Shani Jayanti 2024:दोस्तों! यह माह कुछ खास है क्योंकि इस माह में दंड के देवता माने जाने वाले शनिदेव की जयंती है। चलिए आज के इस खास लेख में हम जानेंगे कि वे शनिदेव- जिनसे सब डरते हैं, फिर भी उनकी पूजा करना नहीं भूलते, उनकी जयंती कब है, और उस विशेष दिन का पंचांग क्या होगा।
हमारे पुराणों में वर्णन मिलता है कि शनिदेव भगवान सूर्य और उनकी दूसरी पत्नी छाया के पुत्र हैं। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार शनि का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या को हुआ था। तब से हर वर्ष इस तिथि को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। शनि जयंती को शनि अमावस्या और शनिश्वर जयंती के नाम से भी जाना जाता है।
Shani Jayanti 2024: “इस वर्ष कब होगी शनि जयंती ?”
शनि जयन्ती – 06 जून 2024, गुरुवार
शनि जयंती प्रारंभ – 05 जून, बुधवार 07:54 PM
शनि जयंती समाप्त – 06 जून, गुरुवार 06:07 PM
Shani Jayanti 2024: इस दिन के अन्य विशेष मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – 03:44 AM से 04:26 AM
प्रातः सन्ध्या 04:05 AM से 05:07 AM
अभिजित मुहूर्त – 11:30 AM से 12:24 PM
विजय मुहूर्त – 02:13 PM से 03:08 PM
गोधूलि मुहूर्त-06:45 PM से 07:06 PM
सायाह्न सन्ध्या 06:47 PM से 07:49 PM
अमृत काल- 05:12 PM से 06:44 PM
निशिता मुहूर्त 11:33 PM से 12:15 AM
राहुकाल – 01:39 AM से 03:22 AM
गुलिक काल – 08:32 AM से 10:14 AM
तो यह थी शनि जयंती की तिथि के बारे में जरूरी जानकारी। शनि जयंती पर भक्त भगवान शनि को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखते हैं और उनका आशीर्वाद लेने के लिए शनि मंदिर में जाते हैं।
धार्मिक जानकारियों के लिए बने रहें धार्मिक सुविचार के साथ
Shani Jayanti 2024: कब है शनि जयंती – पंचांग जानें — विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं जीवन दर्शन
सनातन ज्ञान, श्रीमद्भगवद्गीता एवं व्यावहारिक जीवन में मानसिक शांति के सूत्रभारतीय सनातन दर्शन में प्रत्येक विचार को एक बीज के समान माना गया है। जैसा विचार हमारे मन में अंकुरित होता है, वैसा ही हमारा दृष्टिकोण और आचरण बनता है। जब व्यक्ति दैनिक जीवन की आपाधापी में ईश्वर पर विश्वास और सकारात्मक सोच को अपनाता है, तो कठिन से कठिन परिस्थिति भी सरल प्रतीत होने लगती है।
इस विचार का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को बाहरी परिस्थितियों से विचलित होने के बजाय अपने अंतर्मन को स्थिर और शांत रखना चाहिए। जब मन में संतोष और श्रद्धा होती है, तो जीवन में स्वतः ही सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
- अतीत की व्यर्थ चिंता छोड़ें: जो बीत चुका है, उस पर शोक करने से केवल मानसिक ऊर्जा नष्ट होती है। हर नई सुबह को ईश्वर का नया अवसर मानकर कर्म करें।
- निष्काम कर्म की शक्ति (भगवद्गीता दर्शन): अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें, किंतु फल की अत्यधिक आसक्ति से बचें। जब हम परिणामों के दबाव से मुक्त होकर काम करते हैं, तो कार्यक्षमता दोगुनी हो जाती है।
- दैनिक 5 मिनट मौन एवं श्वास ध्यान: प्रतिदिन प्रातःकाल 5 से 10 मिनट शांत बैठकर अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान लगाएं और इष्ट मंत्र (जैसे ॐ नमः शिवाय या गायत्री मंत्र) का मानसिक स्मरण करें।
“आज के दिन मैं किसी के प्रति कटु वाणी का प्रयोग नहीं करूंगा। जो परिस्थिति मेरे नियंत्रण में नहीं है, उसकी चिंता छोड़कर अपने आज के कर्म को पूरी ईमानदारी से करूंगा।”
💡 सकारात्मक विचार ही सुखी एवं सफल जीवन की असली कुंजी हैं।उत्तर: यह विचार व्यक्ति को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य, सकारात्मकता और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
उत्तर: प्रतिदिन सुबह 10 मिनट पवित्र ग्रंथों का पठन, 108 नाम-जप और प्रकृति के सानिध्य में ध्यान लगाने से मन सकारात्मक बनता है।






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