Surya Grahan 2024:चैत्र मास के प्रारंभ के साथ ही इस साल का पहला सूर्यग्रहण लगेगा। ज्योतिष के अनुसार ग्रहण के समय या उसके बाद पितरों का श्राद्ध एवं तर्पण करने का विशेष महत्व है। इसके अलावा ग्रहण के कई और भी धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व हैं। ग्रहण के प्रारंभ होने के कुछ समय पहले से सूतककाल लग जाता है, और ये ‘ग्रहण’ समाप्त होने तक रहता है चलिए जानतें हैं कि 2024 में सूर्यग्रहण कब लगेगा और कहाँ-कहाँ प्रभावी रहेगा?
Surya Grahan 2024: इस लेख में आप जानेंगे
1. साल 2024 का पहला सूर्यग्रहण कब है?
2. ये सूर्यग्रहण कहाँ-कहाँ दिखाई देगा?
3. भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं?
4. वलयाकार/कंकणाकृति सूर्य ग्रहण क्या है?
Surya Grahan 2024: 2024 का दूसरा सूर्यग्रहण
सूर्यग्रहण – 08 अप्रैल 2024, सोमवार को लग रहा है।
• राशि- ये सूर्य ग्रहण मीन राशि में लगेगा।
• नक्षत्र- ये सूर्य ग्रहण स्वाती नक्षत्र में लगेगा।
ग्रहण प्रारंभ 8 अप्रैल, सोमवार को 09:12 PM पर होगा।
• ग्रहण समाप्त- 09 अप्रैल, मंगलवार को 01:25 AM तक रहेगा।
Surya Grahan 2024: सूर्यग्रहण यहां-यहाँ दिखाई देगा
08 अप्रैल 2024 में लगने वाला सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन ये ग्रहण दुनिया के कई अन्य हिस्सों जैसे मध्य अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, आयरलैंड, इंग्लैंड के कुछ उत्तरी पश्चिमी क्षेत्रों और कनाडा में दिखाई देगा।
Surya Grahan 2024:भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं
सूर्य ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। आपको बता दें कि सूतक काल में पूजा-पाठ करना वर्जित माना गया है। यहां तक कि इस अवधि में भगवान की मूर्ति का भी स्पर्श नहीं करना चाहिए। लेकिन सूतक काल केवल उसी जगह पर मान्य होता है, जहां ग्रहण दृश्यमान हो, अर्थात् दिखाई दे। अप्रैल में लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, ऐसे में देश में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।
Surya Grahan 2024:वलयाकार/कंकणाकृति सूर्यग्रहण
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में गिना जाता है और यह आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आपको बता दें कि चंद्रमा जब सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तो इस खगोलीय घटना को सूर्य ग्रहण कहते हैं।
इस बार लगने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार होगा। यह ग्रहण सबसे दुर्लभ माना जाता है। इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहते हैं। वलयाकार या कंकणाकृति सूर्य ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा धरती से काफी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है। इसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता है, और पृथ्वी से देखने पर सूर्य का बाहरी हिस्सा एक कंगन की तरह चमकता हुआ दिखाई देता है।
तो ये थी साल 2024 में लगने वाले पहले सूर्यग्रहण की जानकारी। इस सूर्यग्रहण का किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जानने के लिए जुड़े रहिए धार्मिक सुविचार के इस धार्मिक मंच पर।
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Surya Grahan 2024: “भारत में सूर्य ग्रहण कितने बजे है?” जाने 2024 का पहला सूर्यग्रहण तिथि व अन्य जानकारी — विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं जीवन दर्शन
सनातन ज्ञान, श्रीमद्भगवद्गीता एवं व्यावहारिक जीवन में मानसिक शांति के सूत्रभारतीय सनातन दर्शन में प्रत्येक विचार को एक बीज के समान माना गया है। जैसा विचार हमारे मन में अंकुरित होता है, वैसा ही हमारा दृष्टिकोण और आचरण बनता है। जब व्यक्ति दैनिक जीवन की आपाधापी में ईश्वर पर विश्वास और सकारात्मक सोच को अपनाता है, तो कठिन से कठिन परिस्थिति भी सरल प्रतीत होने लगती है।
इस विचार का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को बाहरी परिस्थितियों से विचलित होने के बजाय अपने अंतर्मन को स्थिर और शांत रखना चाहिए। जब मन में संतोष और श्रद्धा होती है, तो जीवन में स्वतः ही सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
- अतीत की व्यर्थ चिंता छोड़ें: जो बीत चुका है, उस पर शोक करने से केवल मानसिक ऊर्जा नष्ट होती है। हर नई सुबह को ईश्वर का नया अवसर मानकर कर्म करें।
- निष्काम कर्म की शक्ति (भगवद्गीता दर्शन): अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें, किंतु फल की अत्यधिक आसक्ति से बचें। जब हम परिणामों के दबाव से मुक्त होकर काम करते हैं, तो कार्यक्षमता दोगुनी हो जाती है।
- दैनिक 5 मिनट मौन एवं श्वास ध्यान: प्रतिदिन प्रातःकाल 5 से 10 मिनट शांत बैठकर अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान लगाएं और इष्ट मंत्र (जैसे ॐ नमः शिवाय या गायत्री मंत्र) का मानसिक स्मरण करें।
“आज के दिन मैं किसी के प्रति कटु वाणी का प्रयोग नहीं करूंगा। जो परिस्थिति मेरे नियंत्रण में नहीं है, उसकी चिंता छोड़कर अपने आज के कर्म को पूरी ईमानदारी से करूंगा।”
💡 सकारात्मक विचार ही सुखी एवं सफल जीवन की असली कुंजी हैं।उत्तर: यह विचार व्यक्ति को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य, सकारात्मकता और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
उत्तर: प्रतिदिन सुबह 10 मिनट पवित्र ग्रंथों का पठन, 108 नाम-जप और प्रकृति के सानिध्य में ध्यान लगाने से मन सकारात्मक बनता है।





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