Guru Purnima 2024: “गुरु पूर्णिमा कब है?” व्यास पूजा कब है? जानें गुरु पूर्णिमा पूजा विधि तथा अन्य शुभ मुहूर्त

✍️ लेखक एवं संस्थापक: नारायण प्रजापति (Narain Prajapati) • 🕉️ DharmikSuvichar.com
📖 पठनीय समय: ~1 मिनट

Guru Purnima 2024: पौराणिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर महर्षि व्यास का जन्म हुआ था, इस लिए ये पूर्णिमा तिथि हर वर्ष गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के नाम से मनायी जाती है। इस दिन व्यास पूजा का विशेष महत्व है।

Guru Purnima 2024

Guru Purnima 2024: व्यास पूजा 21 जुलाई, रविवार को की जाएगी

पूर्णिमा प्रारंभ – 20 जुलाई 2024 को 05:59 PM बजे **

पूर्णिमा समापन -21 जुलाई 2024 को 03:46 PM बजे **

Guru Purnima 2024: इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त – 03:56 AM से 04:38 AM

प्रातः संध्या – 04:17 AM से 05:20 AM

अभिजित मुहूर्त – 11:37 AM से 12:31 PM

विजय मुहूर्त – 02:19 PM से 03:13 PM

गोधुलि मुहूर्त – 06:47 PM से 07:09 PM

सायाह्न सन्ध्या – 06:49 PM से 07:52 PM

निशिता मुहूर्त – 11:43 PM से 12:26 AM, जुलाई 22

अमृत काल – 06:15 पी एम से 07:45 पी एम

तो यह थी व्यास पूजा के मुहूर्त व पूजा विधि से जुड़ी पूरी जानकारी। आप भी इस व्यास पूर्णिमा इस विधि से महर्षि वेदव्यास की

पूजा करें। हमारी कामना है कि आपको सदैव गुरुओं का सानिध्य व आशीर्वाद मिलता रहे। ऐसे ही व्रत, त्यौहार व अन्य धार्मिक जानकारी की लिए जुड़े रहे धार्मिक सुविचार के साथ

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Guru Purnima 2024: “गुरु पूर्णिमा कब है?” व्यास पूजा कब है? जानें गुरु पूर्णिमा पूजा विधि तथा अन्य शुभ मुहूर्त — विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं जीवन दर्शन

सनातन ज्ञान, श्रीमद्भगवद्गीता एवं व्यावहारिक जीवन में मानसिक शांति के सूत्र
📖 1. इस पावन विचार का गूढ़ आध्यात्मिक भावार्थ (Spiritual Meaning):

भारतीय सनातन दर्शन में प्रत्येक विचार को एक बीज के समान माना गया है। जैसा विचार हमारे मन में अंकुरित होता है, वैसा ही हमारा दृष्टिकोण और आचरण बनता है। जब व्यक्ति दैनिक जीवन की आपाधापी में ईश्वर पर विश्वास और सकारात्मक सोच को अपनाता है, तो कठिन से कठिन परिस्थिति भी सरल प्रतीत होने लगती है।

इस विचार का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को बाहरी परिस्थितियों से विचलित होने के बजाय अपने अंतर्मन को स्थिर और शांत रखना चाहिए। जब मन में संतोष और श्रद्धा होती है, तो जीवन में स्वतः ही सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

🧘 2. मानसिक शांति एवं तनाव (Overthinking) से मुक्ति के 3 स्वर्णिम सूत्र:
  • अतीत की व्यर्थ चिंता छोड़ें: जो बीत चुका है, उस पर शोक करने से केवल मानसिक ऊर्जा नष्ट होती है। हर नई सुबह को ईश्वर का नया अवसर मानकर कर्म करें।
  • निष्काम कर्म की शक्ति (भगवद्गीता दर्शन): अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें, किंतु फल की अत्यधिक आसक्ति से बचें। जब हम परिणामों के दबाव से मुक्त होकर काम करते हैं, तो कार्यक्षमता दोगुनी हो जाती है।
  • दैनिक 5 मिनट मौन एवं श्वास ध्यान: प्रतिदिन प्रातःकाल 5 से 10 मिनट शांत बैठकर अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान लगाएं और इष्ट मंत्र (जैसे ॐ नमः शिवाय या गायत्री मंत्र) का मानसिक स्मरण करें।
🌿 3. आज का सात्विक संकल्प एवं दैनिक चिंतन (Daily Resolution):

“आज के दिन मैं किसी के प्रति कटु वाणी का प्रयोग नहीं करूंगा। जो परिस्थिति मेरे नियंत्रण में नहीं है, उसकी चिंता छोड़कर अपने आज के कर्म को पूरी ईमानदारी से करूंगा।”

💡 सकारात्मक विचार ही सुखी एवं सफल जीवन की असली कुंजी हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
प्रश्न: इस विचार का दैनिक जीवन में क्या महत्व है?

उत्तर: यह विचार व्यक्ति को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य, सकारात्मकता और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

प्रश्न: नकारात्मक विचारों को सकारात्मक ऊर्जा में कैसे बदलें?

उत्तर: प्रतिदिन सुबह 10 मिनट पवित्र ग्रंथों का पठन, 108 नाम-जप और प्रकृति के सानिध्य में ध्यान लगाने से मन सकारात्मक बनता है।

लेखक एवं संपादक: नारायण प्रजापति (संस्थापक, DharmikSuvichar.com)
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