Jaya Parvati Vrat 2024 Date “जया पार्वती व्रत कब है?” जया पार्वती जानिए पूजा का सही समय इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

✍️ लेखक एवं संस्थापक: नारायण प्रजापति (Narain Prajapati) • 🕉️ DharmikSuvichar.com
📖 पठनीय समय: ~1 मिनट

Jaya Parvati Vrat 2024 date :- जया पार्वती व्रत माता पार्वती को समर्पित पर्व है। सुहागिन स्त्रियां इस व्रत को रखकर माता से अपना सुहाग अखंड होने की कामना करती है, और कुंवारी कन्याएं ये व्रत सुयोग्य वर पाने के लिए रखती है। जया पार्वती व्रत हर वर्ष अषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से प्रारंभ होकर कृष्ण पक्ष की तृतीया पर समाप्त होता है।

Jaya Parvati Vrat 2024 date

Jaya Parvati Vrat 2024 Date : इस साल जया पार्वती व्रत कब है?

जया पार्वती व्रत- 19 जुलाई शुक्रवार (आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी)

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ – 18 जुलाई, 2024 को 08:44 PM बजे

त्रयोदशी तिथि समापन 19 जुलाई, 2024 को 07:41 पी एम बजे

जया पार्वती पूजा का समय 19 जुलाई, 06:50 PM से 08:55 PM

Jaya Parvati Vrat 2024 Date :इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त – 03:55 AM से 04:37 AM

प्रातः सन्ध्या – 04:16 AM से 05:19 AM

अभिजित मुहूर्त – 11:37 AM से 12:31 PM

विजय मुहूर्त – 02:19 PM से 03:13 PM

गोधूलि मुहूर्त – 06:48 PM से 07:09 PM

सायाह्न सन्ध्या – 06:50 PM से 07:52 PM

रवि योग – 05:19 AM से 11:21 PM

ऐसा कहा जाता है कि जया पार्वती व्रत का रहस्य विष्णु जी ने लक्ष्मी मां से कहा था। मान्यता है कि जया पार्वती व्रत रखने से विवाहित स्त्रियां सदा सुहागन रहती हैं, और अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाती है। जया पार्वती का व्रत रखने वाली स्त्रियां बालू या रेत का हाथी बनाकर उस पर 5 प्रकार के पुष्प, फल और प्रसाद चढ़ाती है।

जया पार्वती के इस व्रत में नमक का प्रयोग पूरी तरह वर्जित माना गया है। इसके साथ ही इस दिन गेहूं का आटा और सभी प्रकार की सब्जियों का सेवन भी नहीं किया जाता है। इस पर्व पर उपवास रखने वाले भक्त फल, दूध, दही, फलों का रस या दूध से बनी मिठाइयां खा सकते हैं। व्रत के अंतिम दिन मंदिर में पूजा करने के बाद नमक और गेहूं के आटे की रोटी या पुड़ी खाकर व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

तो यह थी जया पार्वती व्रत से जुड़ी जानकारी, हमारी कामना है कि आपका व्रत सफल हो।

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Jaya Parvati Vrat 2024 Date “जया पार्वती व्रत कब है?” जया पार्वती जानिए पूजा का सही समय इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्त — विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं जीवन दर्शन

सनातन ज्ञान, श्रीमद्भगवद्गीता एवं व्यावहारिक जीवन में मानसिक शांति के सूत्र
📖 1. इस पावन विचार का गूढ़ आध्यात्मिक भावार्थ (Spiritual Meaning):

भारतीय सनातन दर्शन में प्रत्येक विचार को एक बीज के समान माना गया है। जैसा विचार हमारे मन में अंकुरित होता है, वैसा ही हमारा दृष्टिकोण और आचरण बनता है। जब व्यक्ति दैनिक जीवन की आपाधापी में ईश्वर पर विश्वास और सकारात्मक सोच को अपनाता है, तो कठिन से कठिन परिस्थिति भी सरल प्रतीत होने लगती है।

इस विचार का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को बाहरी परिस्थितियों से विचलित होने के बजाय अपने अंतर्मन को स्थिर और शांत रखना चाहिए। जब मन में संतोष और श्रद्धा होती है, तो जीवन में स्वतः ही सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

🧘 2. मानसिक शांति एवं तनाव (Overthinking) से मुक्ति के 3 स्वर्णिम सूत्र:
  • अतीत की व्यर्थ चिंता छोड़ें: जो बीत चुका है, उस पर शोक करने से केवल मानसिक ऊर्जा नष्ट होती है। हर नई सुबह को ईश्वर का नया अवसर मानकर कर्म करें।
  • निष्काम कर्म की शक्ति (भगवद्गीता दर्शन): अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें, किंतु फल की अत्यधिक आसक्ति से बचें। जब हम परिणामों के दबाव से मुक्त होकर काम करते हैं, तो कार्यक्षमता दोगुनी हो जाती है।
  • दैनिक 5 मिनट मौन एवं श्वास ध्यान: प्रतिदिन प्रातःकाल 5 से 10 मिनट शांत बैठकर अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान लगाएं और इष्ट मंत्र (जैसे ॐ नमः शिवाय या गायत्री मंत्र) का मानसिक स्मरण करें।
🌿 3. आज का सात्विक संकल्प एवं दैनिक चिंतन (Daily Resolution):

“आज के दिन मैं किसी के प्रति कटु वाणी का प्रयोग नहीं करूंगा। जो परिस्थिति मेरे नियंत्रण में नहीं है, उसकी चिंता छोड़कर अपने आज के कर्म को पूरी ईमानदारी से करूंगा।”

💡 सकारात्मक विचार ही सुखी एवं सफल जीवन की असली कुंजी हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
प्रश्न: इस विचार का दैनिक जीवन में क्या महत्व है?

उत्तर: यह विचार व्यक्ति को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य, सकारात्मकता और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

प्रश्न: नकारात्मक विचारों को सकारात्मक ऊर्जा में कैसे बदलें?

उत्तर: प्रतिदिन सुबह 10 मिनट पवित्र ग्रंथों का पठन, 108 नाम-जप और प्रकृति के सानिध्य में ध्यान लगाने से मन सकारात्मक बनता है।

लेखक एवं संपादक: नारायण प्रजापति (संस्थापक, DharmikSuvichar.com)
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