Durga Ashtami 2023 :-देवी दुर्गा को हिंदू धर्म में जगत जननी के रूप में देखा जाता है। एक जननी की तरह दुर्गा जी सभी मनुष्यों की रक्षा करती हैं, उनको अपना प्रेम देती हैं, और उन पर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखती हैं।हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत किया जाता है। इस दिन दुर्गा माता को प्रसन्न करने के लिए पूरे भक्ति भाव से उनकी पूजा अर्चना की जाती है। इसके साथ ही भक्त मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था को प्रकट करने के लिए व्रत रखते हैं।
इस लेख में,
- मासिक दुर्गाष्टमी की तिथि
- मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व
- मासिक दुर्गाष्टमी की सावधानिया
मासिक दुर्गाष्टमी की तिथि Durga Ashtami 2023
मार्गशीर्ष शुक्ल दुर्गाष्टमी – 20 दिसंबर 2023, बुधवार प्रारम्भ – 19 दिसंबर 2023 मंगलवार 01:06 PM से • समापन – 20 दिसंबर 2023 बुधवार 11:14 AM तक
मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व Durga Ashtami 2023
मासिक दुर्गाष्टमी को हिंदू धर्म में शुभ और महत्वपूर्ण माना गया है। अष्टमी के दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध करके पूरे ब्रह्माण्ड को उस भयानक राक्षस के प्रकोप से मुक्त किया था। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन देवी ने अपने भयानक और रौद्र रूप को धारण किया था, इसलिए इस दिन को देवी भद्रकाली के अवतरण का दिन भी माना जाता है।
इस दिन पूरी निष्ठा के साथ पूजा-पाठ करने और व्रत रखने वाले लोगों पर माता का आर्शीवाद बना रहता है। सच्चे भक्तजनों के सभी कष्ट-विकार दूर होते हैं और उनके घर में सुख-शांति बनी रहती है। मां की उपासना करने वालों की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है।
मासिक दुर्गाष्टमी की सावधानियां Durga Ashtami 2023
- कहा जाता है कि दुर्गाष्टमी के दिन घर में सुख और समृद्धि के लिए मां की ज्योति आग्नेय कोण में जलाना शुभ होता है। इसलिए इस दिन मां की ज्योति को आग्रेय कोण में ही जलाएं। इसके साथ ही इस दिन पूजा करने वाले भक्तों का मुख पूजा के समय पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ ही होना चाहिए। साथ ही ध्यान रहें कि पूजा के समय पूजा का सामान दक्षिण-पूर्व दिशा में ही रखें।
- इसके अलावा मासिक दुर्गाष्टमी के दिन पूजा में तुलसी, आंवला, दूर्वा, मदार और आक के पुष्प का इस्तेमाल ना करें। इस बात का विशेष ख्याल रखना चाहिए। कहा जाता है कि घर में कभी एक से अधिक मां दुर्गा की प्रतिमा या फोटो नहीं रखनी चाहिए।
हम आशा करते हैं माता का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे। जय माता की🙏🙏🙏
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Durga ashtami 2023:मासिक दुर्गाष्टमीः मुहूर्त और महत्व — विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं जीवन दर्शन
सनातन ज्ञान, श्रीमद्भगवद्गीता एवं व्यावहारिक जीवन में मानसिक शांति के सूत्रभारतीय सनातन दर्शन में प्रत्येक विचार को एक बीज के समान माना गया है। जैसा विचार हमारे मन में अंकुरित होता है, वैसा ही हमारा दृष्टिकोण और आचरण बनता है। जब व्यक्ति दैनिक जीवन की आपाधापी में ईश्वर पर विश्वास और सकारात्मक सोच को अपनाता है, तो कठिन से कठिन परिस्थिति भी सरल प्रतीत होने लगती है।
इस विचार का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को बाहरी परिस्थितियों से विचलित होने के बजाय अपने अंतर्मन को स्थिर और शांत रखना चाहिए। जब मन में संतोष और श्रद्धा होती है, तो जीवन में स्वतः ही सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
- अतीत की व्यर्थ चिंता छोड़ें: जो बीत चुका है, उस पर शोक करने से केवल मानसिक ऊर्जा नष्ट होती है। हर नई सुबह को ईश्वर का नया अवसर मानकर कर्म करें।
- निष्काम कर्म की शक्ति (भगवद्गीता दर्शन): अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें, किंतु फल की अत्यधिक आसक्ति से बचें। जब हम परिणामों के दबाव से मुक्त होकर काम करते हैं, तो कार्यक्षमता दोगुनी हो जाती है।
- दैनिक 5 मिनट मौन एवं श्वास ध्यान: प्रतिदिन प्रातःकाल 5 से 10 मिनट शांत बैठकर अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान लगाएं और इष्ट मंत्र (जैसे ॐ नमः शिवाय या गायत्री मंत्र) का मानसिक स्मरण करें।
“आज के दिन मैं किसी के प्रति कटु वाणी का प्रयोग नहीं करूंगा। जो परिस्थिति मेरे नियंत्रण में नहीं है, उसकी चिंता छोड़कर अपने आज के कर्म को पूरी ईमानदारी से करूंगा।”
💡 सकारात्मक विचार ही सुखी एवं सफल जीवन की असली कुंजी हैं।उत्तर: यह विचार व्यक्ति को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य, सकारात्मकता और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
उत्तर: प्रतिदिन सुबह 10 मिनट पवित्र ग्रंथों का पठन, 108 नाम-जप और प्रकृति के सानिध्य में ध्यान लगाने से मन सकारात्मक बनता है।





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