Rohini Vrat 2024 Date: “रोहिणी व्रत क्या है” जानें पूजा विधि और महत्व (Peace spiritual )

Rohini Vrat 2024 Date

Rohini Vrat 2024 Date:ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोहिणी 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है। इस नक्षत्र में किया जाने वाला व्रत रोहिणी व्रत कहलाता है। जैन धर्म के अनुयायी, विशेषकर महिलाएं रोहिणी व्रत का पालन करती हैं। हर माह रोहिणी नक्षत्र की निश्चित अवधि होती है। इस हिसाब से प्रत्येक वर्ष में बारह रोहिणी …

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Narasimha Dwadashi 2024: “नरसिंह द्वादशी कब है?” जाने नरसिंह द्वादशी की महत्व,लाभ,पूजन विधि और नरसिंह द्वादशी से जुड़ी कथा

Narasimha Dwadashi 2024

Narasimha Dwadashi 2024:संसार में जब-जब आसुरी शक्तियों ने अहंकार वश देवों और मनुष्यों पर अत्याचार करना शुरू किया, तब-तब भगवान विष्णु ने अलग-अलग रूप में अवतार लेकर उनका अंत किया। भगवान का नरसिंह अवतार भी उन्हीं अवतारों में से एक है, जो उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध करने एवं भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए …

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आमलकी एकादशी Amalaki Ekadashi 2024 : “आमलकी एकादशी का व्रत कब है?” जाने शुभ मुहूर्त की समग्र जानकारी

Amalaki Ekadashi

Amalaki Ekadashi:हिन्दू धर्म में हर एकादशी व्रत का अपना एक विशेष महत्व होता है। इसी प्रकार आमलकी एकादशी भी असंख्य पुण्यफल देने वाली मानी जाती है। ये एकादशी महाशिवरात्रि एवं होली के बीच पड़ती है, और फाल्गुन मास के ‘शुक्ल पक्ष’ की ‘एकादशी तिथि’ पर मनाई जाती है। इस दिन जातक ‘श्री हरि’ की कृपा …

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Vijaya Ekadashi 2024: “कब है विजया एकादशी 2024 में” जानें शुभ मुहूर्त,पूजा विधि,पूजा की तैयारी

Vijaya Ekadashi 2024

Vijaya Ekadashi 2024:भक्तों, हिंदू शास्त्रों में एकादशी व्रत की अद्भुत महिमा का उल्लेख मिलता है। जिसके अनुसार यह व्रत मनुष्य के समस्त पापों का नाश करता है और मृत्यु के उपरांत मोक्ष भी प्रदान करता है। विजया एकादशी का दिन भी समस्त एकादशियों की तरह भगवान विष्णु को समर्पित है, आप भी इस दिन पूजा-अर्चना …

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विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi): – 13 मार्च 2024, बुधवार इस लेख में जानेंगे,पूजा, मुहूर्त, कथा और महत्व

Vinayak chaturthi

विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi): सनातन धर्म में भगवान गणेश प्रथम पूज्य माने जाते हैं। अर्थात प्रत्येक पूजा से पहले श्री गणेश जी का आह्वान और पूजन किया जाता है। प्रत्येक वर्ष में हर माह आने वाला विनायक चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को ही समर्पित है। हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला यह पर्व मनोवांछित …

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Mahashivratri 2024: “वर्ष 2024 में महाशिवरात्रि कब है?” महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त और प्रमुख शहरों के शुभ मुहूर्त

Pradosh Vrat 2024

Mahashivratri 2024: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। महा शिवरात्रि के दिन भक्त ‘कठिन व्रत’ और चारों प्रहर में भगवान शिव की ‘विशेष पूजा’ करते हैं। वर्ष 2024 में महाशिवरात्रि 08 मार्च, शुक्रवार को मनाई जाएगी। Mahashivratri 2024:महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त चतुर्दशी तिथि …

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Phulera Dooj 2024: “फुलेरा दूज 2024 कब है?” जाने फुलेरा दूज की संपूर्ण जानकारी | phulera dooj significance

Phulera Dooj

Phulera Dooj 2024:फाल्गुन मास में कई ऐसे त्यौहार आते हैं जो हमारी धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को एक बार फिर से ताज़ा करते हैं। उन्हीं में से एक पावन पर्व है ‘फुलेरा दूज’। ये त्यौहार वसंत पंचमी और होली के बीच आता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने राधा के साथ …

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Janaki Jayanti 2024: “जानकी जन्मोत्सव कब है?” जानकी जयंती की संपूर्ण जानकारी

Janaki Jayanti 2024

Janaki Jayanti 2024: हमारे धार्मिक ग्रन्थ इस बात के साक्षी हैं, कि जब-जब लोक कल्याण के लिये भगवान अवतरित हुए हैं, तब-तब उनका साथ देने के लिये उनकी स्त्री रूप ‘शक्ति’ का भी अवतार हुआ है। भगवान अपना प्रयोजन सिद्ध करने के लिये तरह-तरह की लीलायें करते हैं, तो ‘शक्ति’ उस लीला में उनकी सहायक …

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Shabari Jayanti 2024: “शबरी जयंती कब है 2024?” शबरी जयंती की संपूर्ण जानकारी

Shabri Jayanti

Shabari Jayanti: रामायण में हनुमान जी, जामवंत, केवट आदि कई ऐसे पात्र हैं, जो भगवान श्री राम के प्रति अपनी प्रगाढ़ भक्ति के लिए सदैव स्मरण किए जाते हैं। ऐसी ही एक पात्र हैं माता शबरी। दोस्तों, जब तक शबरी के जूठे बेर की चर्चा न हो, तब तक रामायण अधूरी है। श्री राम के …

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Yashoda Jayanti 2024: माँ यशोदा जयंती कब है इसका महत्व, पूजा विधि और कथा सहित संपूर्ण जानकारी Its significance, worship method and story, devotion.

Yashoda Jayanti 2024

Yashoda Jayanti 2024: संसार में ऐसे बहुत से भाग्यशाली भक्त हुए हैं, जिनकी इच्छा के अनुसार स्वयं जगतपालक भगवान ने अनेक रूप धारण किए। लेकिन इस ब्रह्माण्ड के नायक श्री हरि को स्तनपान कराने और ओखल से बांधने का महाभाग्य केवल यशोदा रानी को ही प्राप्त हुआ।   अंकाधिरूढं शिशुगोपगूढं स्तनं धयन्तं कमलैककान्तम्। सम्बोधयामास मुदा …

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