Som Pradosh Vrat (November 17, 2025) | सोम प्रदोष व्रत: शिव कृपा का महापर्व
नमस्ते! शिव भक्तों के लिए साल 2025 का नवंबर महीना एक बहुत ही खास और पवित्र अवसर लेकर आ रहा है। 17 नवंबर, 2025 को हम सब मिलकर सोम प्रदोष व्रत मनाएंगे। अब आप सोच रहे होंगे कि प्रदोष व्रत तो हर महीने आते हैं, इसमें इतना खास क्या है? तो रुकिए, मैं आपको बताता हूँ। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व सौ गुना बढ़ जाता है! सोमवार, जो स्वयं भगवान शिव का दिन है, और प्रदोष तिथि, जो महादेव और माता पार्वती को समर्पित है – इन दोनों का मिलन एक अद्भुत और शक्तिशाली संयोग बनाता है।
इस दिन व्रत रखने और पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करने से न केवल भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, बल्कि चंद्र देव से जुड़े दोष भी शांत होते हैं। क्या आपके मन में शांति की कमी है, या वैवाहिक जीवन में कुछ परेशानियाँ चल रही हैं? या फिर आप अपने करियर में एक नई उड़ान चाहते हैं? यकीन मानिए, यह सोम प्रदोष व्रत आपके लिए ही है।
इस लेख में, हम गहराई से जानेंगे कि 17 नवंबर, 2025 के इस सोम प्रदोष व्रत का क्या महत्व है, इसकी सही और सरल पूजा विधि क्या है, पूजा का शुभ मुहूर्त कब है, और वो कौन-सी दिव्य कथा है जो इस व्रत को और भी विशेष बनाती है। तो चलिए, इस आध्यात्मिक यात्रा पर मेरे साथ चलिए और जानते हैं कि कैसे इस एक दिन की साधना आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
What is Pradosh Vrat? | क्या है प्रदोष व्रत का अर्थ?
प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए रखे जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को, यानी कि तेरहवें दिन, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष, दोनों में आता है। ‘प्रदोष’ शब्द का अर्थ है ‘गोधूलि बेला’ या ‘शाम का समय’। शास्त्रों के अनुसार, यह वो समय होता है जब भगवान शिव कैलाश पर्वत पर अपने रजत भवन में आनंदित होकर नृत्य करते हैं और अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं।
ऐसी मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई शिव पूजा का फल तुरंत मिलता है। जो भी भक्त इस समय पूरी श्रद्धा से महादेव का ध्यान करता है, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति के लिए ही नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, धन-समृद्धि, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान प्राप्ति के लिए भी रखा जाता है।
जैसा कि हमने पहले बात की, जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो उसे ‘सोम प्रदोष व्रत’ कहते हैं। इसका महत्व कई कारणों से बढ़ जाता है:
1. शिव और चंद्र का संगम: सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, और यह चंद्रमा का भी दिन है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है या चंद्र दोष होता है, उन्हें अक्सर मानसिक तनाव, चिंता और निर्णय लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। सोम प्रदोष का व्रत करने से भगवान शिव की कृपा से चंद्र दोष शांत होता है और मानसिक शांति मिलती है।
2. मनोकामना पूर्ति: शास्त्रों में कहा गया है कि सोम प्रदोष का व्रत करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। चाहे वह नौकरी में तरक्की हो, व्यापार में वृद्धि हो, या कोई लंबे समय से रुकी हुई इच्छा हो, भोलेनाथ इस दिन अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं।
3. सुखी वैवाहिक जीवन: जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है या वैवाहिक जीवन में कलह रहती है, उनके लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं है। इस दिन शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
4. रोगों से मुक्ति: ‘भोलेनाथ’ को ‘वैद्यनाथ’ भी कहा जाता है, यानी सभी रोगों को हरने वाले। सोम प्रदोष का व्रत रखने से भक्तों को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु का वरदान मिलता है।
संक्षेप में कहें तो, 17 नवंबर, 2025 का यह सोम प्रदोष व्रत आपके जीवन के हर पहलू को सकारात्मक ऊर्जा से भरने का एक सुनहरा अवसर है।
Puja Muhurat & Timings for November 17, 2025 | पूजा का शुभ मुहूर्त और समय
किसी भी पूजा या व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब उसे सही समय पर किया जाए। 17 नवंबर, 2025 के सोम प्रदोष व्रत के लिए पंचांग के अनुसार तिथियाँ और मुहूर्त इस प्रकार हैं:
* व्रत की तिथि: 17 नवंबर 2025, सोमवार
* मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 17 नवंबर 2025, सुबह 04:47 बजे से
* त्रयोदशी तिथि समाप्त: 18 नवंबर 2025, सुबह 07:12 बजे तक
* प्रदोष काल पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:27 बजे से रात 08:07 बजे तक (नई दिल्ली के समयानुसार)
* पूजा के लिए कुल अवधि: लगभग 2 घंटे 40 मिनट
यह ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा ‘प्रदोष काल’ में ही की जाती है, जो सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले का समय होता है। इसलिए, 17 नवंबर को शाम 5:27 बजे से 8:07 बजे के बीच का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम है।
Step-by-Step Puja Vidhi | घर पर करें सम्पूर्ण पूजा विधि
आपको किसी बड़े अनुष्ठान की ज़रूरत नहीं है। भगवान शिव तो भाव के भूखे हैं। आप घर पर ही बहुत सरल तरीके से यह पूजा कर सकते हैं। चलिए, मैं आपको step-by-step बताता हूँ:
पूजा से पहले की तैयारी:
1. व्रत का संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ, हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा घर में दीपक जलाकर हाथ में थोड़ा जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। मन में कहें, “हे महादेव, मैं आज आपके और माता पार्वती के आशीर्वाद के लिए सोम प्रदोष व्रत का संकल्प लेता/लेती हूँ। कृपा करके मेरा व्रत स्वीकार करें और मेरी मनोकामना पूर्ण करें।”
2. दिन भर उपवास: संकल्प लेने के बाद दिन भर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। आप फलाहार कर सकते हैं, लेकिन अन्न और नमक का सेवन न करें।
प्रदोष काल में पूजा विधि:
1. पुनः स्नान: शाम को पूजा के शुभ मुहूर्त से पहले एक बार फिर स्नान कर लें।
2. पूजा स्थल की स्थापना: घर के मंदिर या किसी साफ-सुथरी जगह पर एक चौकी पर सफेद या लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। अगर शिवलिंग है, तो उसे एक तांबे की प्लेट में रखें।
3. शिवलिंग का अभिषेक: अब शिवलिंग का अभिषेक करें। सबसे पहले शुद्ध जल से, फिर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से स्नान कराएं। अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें। अंत में एक बार फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं और शिवलिंग को साफ कपड़े से पोंछ लें।
4. श्रृंगार और अर्पण: अब भगवान शिव को चंदन का लेप लगाएं, जनेऊ, अक्षत, सफेद फूल, बेलपत्र (3, 5, 7 या 11 पत्ते), धतूरा, भांग और शमी पत्र अर्पित करें। माता पार्वती को सिंदूर, कुमकुम और श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं।
5. भोग और धूप-दीप: इसके बाद भगवान को फल, मिठाई या खीर का भोग लगाएं। धूप और घी का दीपक जलाएं।
6. कथा और आरती: अब शांत मन से बैठकर सोम प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें (कथा नीचे दी गई है)। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें और फिर कपूर से भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
7. प्रसाद वितरण: पूजा समाप्त होने के बाद भगवान से क्षमा याचना करें और फिर प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटें।
8. व्रत का पारण: प्रसाद ग्रहण करने के बाद आप अपना व्रत खोल सकते हैं। व्रत का पारण सात्विक भोजन से करें।
Essential Puja Samagri | आवश्यक पूजा सामग्री की सूची
पूजा से पहले यह सारी सामग्री इकट्ठा कर लें ताकि पूजा के समय कोई बाधा न आए:
* भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति/चित्र या शिवलिंग
* गंगाजल, शुद्ध जल
* कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत के लिए)
* चंदन, रोली, अक्षत (बिना टूटे चावल)
* जनेऊ
* बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, आक के फूल
* फल, मिठाई, मौसमी फल
* धूप, दीपक, कपूर, अगरबत्ती
* एक साफ चौकी और आसन
The Sacred Story of Som Pradosh Vrat | सोम प्रदोष व्रत की दिव्य कथा
किसी भी व्रत का महात्म्य उसकी कथा सुनने से ही पूरा होता है। सोम प्रदोष व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है:
प्राचीन काल में एक नगर में एक बहुत ही गरीब ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का देहांत हो चुका था और वह अपने एकमात्र पुत्र के साथ भिक्षा मांगकर अपना जीवनयापन करती थी। गरीबी और कठिनाइयों के बावजूद, उसकी भगवान शिव में अटूट आस्था थी। वह हर महीने आने वाले दोनों प्रदोष व्रत पूरी श्रद्धा से रखती थी।
एक दिन जब वह भिक्षा मांगकर लौट रही थी, तो उसे रास्ते में विदर्भ देश का राजकुमार घायल अवस्था में मिला। दुश्मनों ने उसके पिता को बंदी बना लिया था और उसका राज्य छीन लिया था। ब्राह्मणी को उस पर दया आ गई और वह उसे अपने घर ले आई। वह अपने बेटे की तरह ही राजकुमार की भी देखभाल करने लगी।
ब्राह्मणी और उसका पुत्र राजकुमार को भी प्रदोष व्रत करने की विधि और महत्व बताते थे। राजकुमार भी उनके साथ मिलकर पूरी श्रद्धा से प्रदोष व्रत करने लगा।
कुछ समय बाद, एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने उस राजकुमार को देखा और उस पर मोहित हो गई। अंशुमति ने अपने माता-पिता के सामने राजकुमार से विवाह करने की इच्छा प्रकट की। उसके माता-पिता भगवान शिव की आज्ञा से इस विवाह के लिए तैयार हो गए।
गंधर्व राजा ने अपनी विशाल सेना की मदद से राजकुमार को उसका राज्य वापस दिलाने में मदद की। राजकुमार ने विदर्भ पर विजय प्राप्त की और अपने पिता को छुड़ा लिया। इसके बाद वह उस दयालु ब्राह्मणी और उसके पुत्र को अपने साथ अपने महल ले आया और उन्हें राजमाता का सम्मान दिया।
यह सब उस ब्राह्मणी की अटूट शिव भक्ति और प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव से ही संभव हुआ था। मान्यता है कि जो कोई भी इस कथा को पढ़ता या सुनता है, उसे भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है और उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
Do’s and Don’ts During the Fast | व्रत में क्या करें और क्या न करें?
व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है:
क्या करें (Do’s):
* सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
* पूरे दिन मन में “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
* मन को शांत और सकारात्मक रखें।
* पूजा प्रदोष काल में ही करें।
* फलाहार में दूध, दही और फल ले सकते हैं।
* जरूरतमंदों को दान दें।
क्या न करें (Don’ts):
* व्रत के दिन अन्न, चावल, गेहूं, दाल और सादा नमक का सेवन न करें।
* लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें।
* किसी के प्रति मन में बुरे विचार न लाएं, क्रोध या झूठ बोलने से बचें।
* दिन में सोने से बचें।
* शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ प्रसाद ग्रहण न करें, इसे किसी नदी में प्रवाहित कर दें या किसी पेड़ के नीचे रख दें।
Divine Benefits of Pradosh Vrat | प्रदोष व्रत के अद्भुत लाभ
नियमित रूप से प्रदोष व्रत करने से, विशेषकर सोम प्रदोष व्रत करने से, जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं:
* मानसिक शांति: चंद्र दोष दूर होने से मन शांत होता है, तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है।
* धन और समृद्धि: भगवान शिव की कृपा से जीवन में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
* संतान सुख: जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उन्हें इस व्रत को करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
* शत्रुओं पर विजय: गुरु प्रदोष व्रत शत्रुओं पर विजय दिलाता है।
* पापों का नाश: यह व्रत जाने-अनजाने में हुए सभी पापों को नष्ट कर देता है और व्यक्ति को मोक्ष की ओर ले जाता है।
तो, इस 17 नवंबर, 2025 को आने वाले सोम प्रदोष व्रत के अवसर को हाथ से न जाने दें। यह सिर्फ एक व्रत नहीं है, बल्कि यह अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का, अपनी समस्याओं का समाधान पाने का और भगवान शिव की असीम कृपा को अपने जीवन में आमंत्रित करने का एक दिव्य माध्यम है। पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस व्रत को करें, और देखें कि भोलेनाथ कैसे आपके जीवन को खुशियों से भर देते हैं।
हर हर महादेव!
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FAQS:
सोम प्रदोष व्रत (17 नवंबर 2025) का शुभ मुहूर्त क्या है? (What is the auspicious time for Som Pradosh Vrat on Nov 17, 2025?)
17 नवंबर, 2025 को सोम प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 05:27 बजे से रात 08:07 बजे के बीच है। यह प्रदोष काल का समय है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए? (What can we eat during Pradosh Vrat?)
प्रदोष व्रत में अन्न और नमक का सेवन वर्जित होता है। आप फलाहार कर सकते हैं, जिसमें फल, दूध, दही, साबूदाना, और कुट्टू के आटे से बनी चीजें शामिल हैं। व्रत के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना भी महत्वपूर्ण है।
सोम प्रदोष व्रत का क्या महत्व है? (What is the significance of Som Pradosh Vrat?)
जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष कहते हैं। इसका महत्व बहुत अधिक होता है क्योंकि सोमवार भगवान शिव का दिन है। यह व्रत करने से चंद्र दोष शांत होता है, मानसिक शांति मिलती है, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
क्या महिलाएं प्रदोष व्रत कर सकती हैं? (Can women observe Pradosh Vrat?)
हाँ, बिल्कुल। प्रदोष व्रत कोई भी कर सकता है, चाहे वह पुरुष हो या महिला, विवाहित हो या अविवाहित। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए सुखी वैवाहिक जीवन और संतान प्राप्ति के लिए बहुत फलदायी माना जाता है।


