सितंबर 2025 का महीना खगोलीय और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से अत्यधिक महत्वपूर्ण होने वाला है। इस माह में एक ओर जहाँ चंद्र ग्रहण का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पितृ पक्ष की पवित्र अवधि भी इसी समय पड़ रही है। जब ये दोनों महत्वपूर्ण घटनाएँ एक साथ घटित होती हैं, तो उनका आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। “सितंबर 2025 चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष” का यह दुर्लभ संयोग न केवल खगोलविदों के लिए बल्कि आध्यात्मिक साधकों और ज्योतिष प्रेमियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
यह वह समय है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं हमारे पितरों की आत्माओं से जुड़ने और उन्हें शांति प्रदान करने के लिए एक विशेष द्वार खोलती हैं। लगभग 100 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब पितृ पक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण के साथ होगी और समापन सूर्य ग्रहण के साथ होगा।
यह लेख आपको सितंबर 2025 चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष के दौरान होने वाले 5 गुप्त रहस्यों से अवगत कराएगा, जो आपको इस पवित्र अवधि का अधिकतम लाभ उठाने में मदद करेंगे। हम जानेंगे कि कैसे यह संयोग हमारे जीवन, हमारे पूर्वजों और हमारी आध्यात्मिक यात्रा पर गहरा प्रभाव डालता है।
सितंबर 2025 चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष का खगोलीय और ज्योतिषीय महत्व
सितंबर 2025 में घटित होने वाला चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना से कहीं अधिक है, विशेष रूप से जब यह पितृ पक्ष के साथ आता है। चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी रुक जाती है। यह एक ऐसा क्षण होता है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं एक विशेष संरेखण में होती हैं, जिसका पृथ्वी और उस पर रहने वाले सभी जीवों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा मन, भावनाओं, मातृ पक्ष और पितरों का कारक ग्रह है। चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का पीड़ित होना इन सभी क्षेत्रों पर विशेष प्रभाव डालता है। सितंबर 2025 में यह चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को पड़ रहा है, जो पितृ पक्ष की शुरुआत का भी दिन है। यह ग्रहण शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि में होगा।
इस संयोग से ब्रह्मांड में एक ऐसी ऊर्जा का संचार होता है जो पितरों की आत्माओं को मुक्ति और शांति प्रदान करने के लिए किए गए कर्मों को अत्यधिक प्रभावी बना देती है। इस दौरान, पितरों का लोक चंद्रमा के ऊपरी भाग में मौजूद होने की मान्यता है, जिससे इस अवधि में किए गए कर्म सीधे उन तक पहुँचते हैं।
चंद्र ग्रहण की तिथि और समय (7 सितंबर 2025)
* चंद्र ग्रहण का आरंभ: 7 सितंबर 2025, रात 8:58 बजे (भारतीय समयानुसार)
* चंद्र ग्रहण का मध्य: रात 11:41 बजे
* चंद्र ग्रहण का मोक्ष/समापन: 8 सितंबर 2025, तड़के 2:25 बजे (भारतीय समयानुसार)
* कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 29 मिनट
सूतक काल और इसके नियम
चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। 7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर 12:57 बजे से प्रारंभ होगा और ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। सूतक काल को एक अशुभ अवधि माना जाता है, जिसमें कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है:
* धार्मिक कार्य वर्जित: सूतक काल में पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और नए शुभ कार्य (जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश) वर्जित होते हैं। बड़े-बड़े मंदिरों के पट भी बंद रहते हैं।
* भोजन और जल: सूतक काल में भोजन पकाना और खाना वर्जित होता है। हालांकि, बच्चों, वृद्धों और रोगियों के लिए यह नियम शिथिल है। पानी में तुलसी दल डालकर रखना चाहिए ताकि वह शुद्ध बना रहे। पके हुए भोजन और पानी में कुशा या तुलसी पत्र डालना चाहिए.
* गर्भवती महिलाएं: गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और नुकीली वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्हें हनुमान चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
* श्राद्ध और तर्पण: पूर्णिमा श्राद्ध करने वाले लोगों को सूतक लगने से पहले, यानी 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से पहले ही अपने पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर लेना चाहिए।
* मंत्र जाप और ध्यान: सूतक काल और ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान करना अत्यंत फलदायी होता है। यह नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा करता है और आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है।
पितृ पक्ष 2025: पूर्वजों को समर्पित पवित्र अवधि
पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष या महालय पक्ष भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए समर्पित 16 दिवसीय पवित्र अवधि है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलता है। सितंबर 2025 में पितृ पक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर तक रहेगा।
मान्यता है कि इन 16 दिनों के दौरान हमारे पितर पृथ्वी लोक पर अपने वंशजों से मिलने आते हैं। इस अवधि में श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य से पितरों को मोक्ष मिलता है और वे प्रसन्न होकर अपने परिवार को सुख, समृद्धि, दीर्घायु और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए भी यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण का महत्व
श्राद्ध एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘श्रद्धा से दिया गया’। यह पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उन्हें तृप्त करने का एक माध्यम है। तर्पण में जल, दूध, तिल और जौ मिलाकर पितरों को अर्पित किया जाता है। इन कर्मों से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।
सितंबर 2025 चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष: आध्यात्मिक जागरण का दुर्लभ संयोग
जब चंद्र ग्रहण और पितृ पक्ष एक साथ आते हैं, तो यह एक असाधारण आध्यात्मिक अवसर बन जाता है। चंद्रमा का संबंध पितरों से गहरा होता है, और ग्रहण के दौरान चंद्रमा पर पड़ने वाला प्रभाव पितृ लोक और पृथ्वी के बीच एक शक्तिशाली ऊर्जा पुल का निर्माण करता है। इस समय किए गए कर्म सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होते हैं। यह संयोग पितरों की आत्माओं को सीधे ऊर्जा और शांति पहुँचाने का एक अद्वितीय मौका प्रदान करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दौरान किए गए श्राद्ध और तर्पण प्रत्यक्ष रूप से पितरों को शांति और मुक्ति प्रदान करते हैं।
सितंबर 2025 चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष: 5 गुप्त रहस्य
यह दुर्लभ संयोग कुछ ऐसे ‘गुप्त रहस्य’ उजागर करता है, जिनका ज्ञान आपको इस पवित्र अवधि का अधिकतम लाभ उठाने में मदद करेगा:
1. पितरों की आत्माओं के लिए मोक्ष का प्रवर्धित द्वार
चंद्र ग्रहण और पितृ पक्ष का एक साथ आना पितरों की आत्माओं के लिए मोक्ष के द्वार को अत्यधिक सक्रिय कर देता है। इस अवधि में ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं विशेष रूप से पितृ लोक की ओर प्रवाहित होती हैं। जो श्राद्ध कर्म सामान्य दिनों में किए जाते हैं, वे इस संयोग के दौरान कई गुना अधिक शक्ति के साथ पितरों तक पहुँचते हैं। यह वह समय है जब आप अपने पूर्वजों को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाने और उन्हें उच्चतम लोकों में स्थान दिलाने में सहायता कर सकते हैं। यह न केवल पितरों को शांति देता है, बल्कि वंशजों के लिए भी उनके आशीर्वाद के रूप में सुख-समृद्धि लाता है।
2. पितृ दोष निवारण के लिए अचूक अवसर
पितृ दोष एक गंभीर ज्योतिषीय स्थिति है जो पूर्वजों के असंतुष्ट होने या उनके प्रति किए गए कर्तव्यों में कमी के कारण उत्पन्न होती है। इसके कारण व्यक्ति के जीवन में कई बाधाएं आती हैं, जैसे विवाह में देरी, संतान प्राप्ति में समस्या, आर्थिक संकट, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ आदि। चंद्र ग्रहण के साथ पितृ पक्ष का यह संयोग पितृ दोष निवारण के लिए एक ‘अचूक अवसर’ प्रदान करता है।
ग्रहण के दौरान और पितृ पक्ष में किए गए विशिष्ट उपाय, जैसे ‘गजेंद्र मोक्ष’ का पाठ, शिव पूजा, और विशेष तर्पण, पितृ दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और उन्हें पूरी तरह से समाप्त करने में अत्यधिक प्रभावी होते हैं। ज्योतिर्विदों के अनुसार, ग्रहण के समय राहु और केतु की छाया के कारण उत्पन्न दोषों की शांति कराने से आने वाला समय धीरे-धीरे अनुकूल होता रहता है।
3. गहन आध्यात्मिक साधना और आत्म-चिंतन का समय
यह अवधि केवल पितरों के लिए ही नहीं, बल्कि स्वयं की आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण है। ग्रहण की ऊर्जाएं और पितृ पक्ष का गंभीर वातावरण आत्म-चिंतन, ध्यान और आंतरिक शुद्धि के लिए एक आदर्श माहौल बनाते हैं। इस समय किया गया मंत्र जाप, ध्यान और प्राणायाम सामान्य दिनों की तुलना में अधिक गहराई से जुड़ता है।
यह आपको अपनी जड़ों से जुड़ने, अपने कर्मों का विश्लेषण करने और अपने जीवन के उद्देश्य को समझने में मदद करता है। यह आध्यात्मिक जागरण का एक ऐसा दुर्लभ क्षण है, जिसे साधकों को चूकना नहीं चाहिए।
4. ग्रह-नक्षत्रों का विशेष प्रभाव और व्यक्तिगत कुंडली पर असर
चंद्र ग्रहण का शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि में होना, साथ ही पितृ पक्ष का संयोग, सभी राशियों पर विशेष प्रभाव डालेगा। यह समय आपकी कुंडली में स्थित पितृ दोषों और अन्य ग्रह दोषों को उजागर कर सकता है। हालांकि, यह उन दोषों को शांत करने का भी अवसर प्रदान करता है।
ज्योतिषियों से सलाह लेकर अपनी कुंडली के अनुसार विशेष उपाय करना इस अवधि में अत्यधिक फलदायी हो सकता है। कुछ राशियों को लाभ हो सकता है, जबकि अन्य को थोड़ा सावधान रहना होगा। यह समय ग्रह शांति और नकारात्मक ऊर्जाओं के शमन के लिए भी उत्तम है।
5. विशिष्ट अनुष्ठानों और दान का प्रवर्धित फल
इस दुर्लभ संयोग में किए गए विशिष्ट अनुष्ठान और दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल प्रदान करते हैं। पितृ पक्ष में तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन, गौ दान, वस्त्र दान और अन्न दान का विशेष महत्व है। चंद्र ग्रहण के दौरान किए गए दान-पुण्य और मंत्र जाप भी अत्यधिक शक्तिशाली होते हैं।
इस अवधि में किसी पवित्र नदी में स्नान करना या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसे कर्म न केवल पितरों को तृप्त करते हैं, बल्कि आपके वर्तमान और भविष्य को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।
सितंबर 2025 चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष के दौरान क्या करें और क्या न करें
इस पवित्र और शक्तिशाली अवधि का अधिकतम लाभ उठाने के लिए, कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
क्या करें (Dos):
1. श्राद्ध और तर्पण: सूतक काल से पहले (7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से पहले) पूर्णिमा श्राद्ध और तर्पण करें। अन्य तिथियों पर, दोपहर के बाद कुतुब मुहूर्त (सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 तक) और रोहिणी मुहूर्त (दोपहर 12:30 से 1:30 बजे तक) तर्पण के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं।
2. मंत्र जाप और ध्यान: ग्रहण के पूरे समय और सूतक काल में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’, ‘महामृत्युंजय मंत्र’ या गायत्री मंत्र का जाप करें। यह नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा करेगा और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाएगा।
3. दान-पुण्य: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके गरीबों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, काले तिल, गुड़, घी, चाँदी, या अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करें। गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन खिलाएं.
4. पवित्र स्नान: ग्रहण के बाद पवित्र नदियों में स्नान करें। यदि संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
5. पितृ दोष निवारण उपाय: ‘गजेंद्र मोक्ष’ स्तोत्र का पाठ करें, पीपल के वृक्ष की पूजा करें और उसमें जल अर्पित करें। पितरों के नाम से शिव मंदिर में जल चढ़ाएं।
6. सात्विक भोजन: पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन करें। मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से बचें।
7. शांत वातावरण: घर में शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। अनावश्यक वाद-विवाद से बचें।
क्या न करें (Don’ts):
1. शुभ कार्य: सूतक काल और ग्रहण के दौरान कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य न करें।
2. भोजन पकाना और खाना: सूतक काल में भोजन पकाने और खाने से बचें (बच्चों, वृद्धों और रोगियों को छोड़कर)।
3. मूर्ति स्पर्श: सूतक काल में देवी-देवताओं की मूर्तियों का स्पर्श न करें। मंदिरों के पट बंद रखें।
4. बाल और नाखून काटना: इस अवधि में बाल और नाखून काटने से बचें।
5. नए वस्त्र या वस्तुएं खरीदना: पितृ पक्ष में नए कपड़े, गहने, वाहन या अन्य महंगी चीजें खरीदने से परहेज करें।
6. अपमान या गुस्सा: किसी का अपमान न करें या अनावश्यक गुस्सा न करें, विशेषकर घर के बड़ों का।
7. यात्रा: ग्रहण के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।
पितृ दोष निवारण के विशेष उपाय इस चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष में
यह दुर्लभ संयोग पितृ दोष से मुक्ति पाने का एक स्वर्णिम अवसर है। यहाँ कुछ विशेष उपाय दिए गए हैं जो इस अवधि में अत्यधिक प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं:
* ग्रहण समाप्ति के बाद तर्पण: ग्रहण के मोक्ष के बाद तुरंत स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा, काले तिल और जल से अपने पितरों का तर्पण करें। यह प्रक्रिया पवित्र नदी के तट पर या घर पर ही की जा सकती है।
* ‘गजेंद्र मोक्ष’ स्तोत्र का पाठ: पितृ पक्ष में ‘गजेंद्र मोक्ष’ स्तोत्र का नियमित पाठ पितरों को मोक्ष प्रदान करने में अत्यंत सहायक माना जाता है। ग्रहण के दौरान इसका पाठ करने से फल कई गुना बढ़ जाता है।
* पीपल वृक्ष की सेवा: पीपल के वृक्ष में सभी देवी-देवताओं और पितरों का वास माना जाता है। इस अवधि में पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाना, दीपक जलाना और उसकी परिक्रमा करना पितृ दोष को शांत करता है।
* ब्राह्मण और गरीबों को भोजन: अपनी सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों और गरीब व्यक्तियों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं। उन्हें वस्त्र और दक्षिणा भी दें।
* महामृत्युंजय मंत्र का जाप: ग्रहण के दौरान और पितृ पक्ष में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से पितरों को शांति मिलती है और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य लाभ होता है।
* काले तिल का दान: काले तिल का दान पितृ दोष निवारण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रहण के बाद या पितृ पक्ष में प्रतिदिन काले तिल का दान करें।
* शिवलिंग पर जल और बेलपत्र: शिवजी को पितरों का अधिपति माना जाता है। शिवलिंग पर प्रतिदिन जल और बेलपत्र अर्पित करें, और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
निष्कर्ष: आध्यात्मिक उन्नति और पितरों के आशीर्वाद का महासंयोग
सितंबर 2025 का चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष एक सामान्य खगोलीय घटना मात्र नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और पितरों के आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक महासंयोग है। यह वह समय है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं हमें अपने पूर्वजों से जुड़ने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उन्हें मोक्ष दिलाने का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करती हैं। इस अवधि में श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए किए गए कर्म न केवल पितृ दोष से मुक्ति दिलाते हैं, बल्कि हमारे जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य भी लाते हैं।
धार्मिक सुविचार आपको इस पवित्र अवधि का पूरी श्रद्धा और जागरूकता के साथ पालन करने के लिए प्रेरित करता है। इन 5 गुप्त रहस्यों को समझकर और बताए गए उपायों का पालन करके, आप अपने और अपने परिवार के लिए एक उज्जवल और धन्य भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। अपने पितरों को स्मरण करें, उन्हें सम्मान दें, और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को आलोकित करें। यह समय आत्म-शुद्धि, करुणा और पूर्वजों के प्रति गहरे सम्मान का है। इस अवसर को न चूकें और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करें।
शुभकामनाएं!
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सितंबर 2025 चंद्र ग्रहण और पितृ पक्ष विशेष FAQ
प्रश्न 1: सितंबर 2025 में चंद्र ग्रहण और पितृ पक्ष का संयोग क्यों विशेष है?
उत्तर:सितंबर 2025 में चंद्र ग्रहण (7 सितंबर) और पितृ पक्ष (7–21 सितंबर) का एक साथ पड़ना एक अत्यंत दुर्लभ खगोलीय और आध्यात्मिक संयोग है, जो लगभग 100 साल बाद हो रहा है। यह अवधि पितरों की आत्माओं की शांति और मोक्ष के लिए किए गए कर्मों के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है। इस समय आध्यात्मिक उन्नति और पितृ दोष निवारण का एक शक्तिशाली अवसर मिलता है।
प्रश्न 2: चंद्र ग्रहण के सूतक काल के दौरान श्राद्ध और तर्पण कैसे करें?
उत्तर:7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर 12:57 बजे से शुरू होगा और ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल में धार्मिक कार्य वर्जित होते हैं। इसलिए पूर्णिमा श्राद्ध करने वाले लोगों को दोपहर 12:57 बजे से पहले ही पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर लेना चाहिए।
ग्रहण के मोक्ष (समाप्ति) के बाद स्नान करके शुद्ध होकर श्राद्ध कर्म भी किए जा सकते हैं।
प्रश्न 3: पितृ पक्ष में पड़ने वाले चंद्र ग्रहण का क्या ज्योतिषीय प्रभाव होगा?
उत्तर:यह ग्रहण शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि में होगा। चंद्रमा पितरों और मन का कारक है, इसलिए पितृ पक्ष में चंद्र ग्रहण का पड़ना ज्योतिषीय रूप से महत्वपूर्ण है। यह समय पितरों से जुड़ाव को गहरा करता है और पितृ दोष को सक्रिय भी कर सकता है। हालांकि, इसे शांत करने और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने का भी यह एक असाधारण अवसर है। वैश्विक स्तर पर आंतरिक राजनीति में कटुता बढ़ने की संभावना भी है।
प्रश्न 4: पितृ दोष निवारण के लिए इस अवधि में कौन से विशेष उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर:इस दुर्लभ संयोग में पितृ दोष निवारण के उपाय अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं। इनमें शामिल हैं:
- ग्रहण के बाद पवित्र नदियों में स्नान
- पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान
- ब्राह्मणों को भोजन व वस्त्र दान
- “ॐ पितृ देवतायै नमः” मंत्र का जाप
- “गजेंद्र मोक्ष” का पाठ
- पीपल के वृक्ष की पूजा
- काले तिल, जौ और कुश से तर्पण
- ध्यान और आध्यात्मिक साधना भी पितरों की शांति के लिए विशेष फलदायी है।
प्रश्न 5: क्या पितृ पक् में चंद्र ग्रहण के दौरान कोई शुभ कार्य कर सकते हैं?
उत्तर:सूतक काल (7 सितंबर दोपहर 12:57 बजे से) के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे शुभ कार्य वर्जित हैं। हालांकि, पितरों से संबंधित कर्मकांड (श्राद्ध, तर्पण) सूतक से पहले किए जा सकते हैं। ग्रहण के समय मंत्र जाप, ध्यान और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

