महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि: घर पर सरल step‑by‑step शिवपूजन गाइड

महाशिवरात्रि 2026: पूजा की तैयारी से लेकर विसर्जन तक – सम्पूर्ण प्रैक्टिकल गाइड

महाशिवरात्रि का पर्व नजदीक है और 2026 में यह 15 फरवरी, रविवार को मनाया जा रहा है। अक्सर हम पूजा के समय हड़बड़ी में रहते हैं कि क्या सामान लाएं, कैसे शुरुआत करें या कहीं कोई गलती न हो जाए।

महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि

अगर आप इस बार बिना किसी कन्फ्यूजन के, सुकून से और विधि-विधान के साथ महादेव की पूजा करना चाहते हैं, तो यह गाइड सिर्फ आपके लिए है। यहाँ हम भारी-भरकम शब्दों के बजाय सीधी और सरल भाषा में जानेंगे कि तैयारी कब शुरू करें और पूजा कैसे संपन्न करें।

महाशिवरात्रि की तैयारी कब से शुरू करें?

असली तैयारी महाशिवरात्रि वाले दिन नहीं, बल्कि एक दिन पहले यानी त्रयोदशी (14 फरवरी 2026) से शुरू हो जानी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, शिवरात्रि का व्रत रखने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले से ही तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) पूरी तरह त्याग देना चाहिए।

14 फरवरी की शाम को क्या करें:

अपने घर के मंदिर की सफाई कर लें। शिव जी की मूर्ति या शिवलिंग को साफ कपड़े से पोंछ लें। अगर आप व्रत रखने वाले हैं, तो रात को बहुत हल्का भोजन (जैसे दलिया या खिचड़ी) लें ताकि अगले दिन व्रत के दौरान शरीर में आलस्य न रहे और गैस या एसिडिटी की समस्या न हो।

आवश्यक पूजा सामग्री सूची

पूजा के समय बार-बार उठना न पड़े, इसके लिए 15 फरवरी की सुबह ही एक थाली में ये चीजें सजाकर रख लें। बहुत ज्यादा ताम-झाम की जरूरत नहीं है, शिव जी इन मूलभूत चीजों से भी प्रसन्न हो जाते हैं:

अभिषेक के लिए:

एक लोटा जल (तांबे का हो तो उत्तम), कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद और शक्कर। (इन्हें अलग-अलग कटोरी में रखें)।

अर्पण के लिए:

बेलपत्र (कम से कम 5 या 11), धतूरा, मदार के फूल, शमी के पत्ते, चंदन (सफेद या पीला), जनेऊ, भस्म और इत्र।

अन्य सामग्री:

दीपक, घी, बाती, माचिस, कपूर, अगरबत्ती, मौली (कलावा), और भोग के लिए कोई भी मौसमी फल (बेर, केला) या मिठाई।

व्रत व उपवास के नियम (पूजा से पहले)

पूजा विधि शुरू करने से पहले व्रत के कुछ नियम जान लेना जरूरी है ताकि आपकी तपस्या खंडित न हो:

सात्विक विचार: केवल भूखा रहना व्रत नहीं है। व्रत के दिन किसी पर गुस्सा न करें, किसी की बुराई न करें और झूठ न बोलें।

सोने की मनाही: महाशिवरात्रि की दोपहर में सोने से बचें। ऐसा माना जाता है कि दिन में सोने से व्रत का प्रभाव कम हो जाता है।

अन्न का त्याग: व्रत में गेहूं, चावल या दाल का सेवन न करें। आप फलाहार, दूध, चाय या कुट्टू के आटे का सेवन कर सकते हैं।

ब्रह्मचर्य: मन और शरीर से पवित्रता बनाए रखें।

महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि – स्टेप‑बाय‑स्टेप

घर पर पूजा करते समय आप खुद ही अपने पुरोहित बनें। इस सरल विधि का पालन करें:

स्टेप 1: आसन और शुद्धि

शाम के समय (या जिस प्रहर में आप पूजा कर रहे हैं) स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। सबसे पहले अपने ऊपर थोड़ा जल छिड़कें और मन को शांत करें।

स्टेप 2: दीपक जलाएं

पूजा की शुरुआत दीपक जलाकर करें। यह अग्नि देव की साक्षी होती है।

स्टेप 3: गणेश वंदन

हाथ में थोड़ा चावल और फूल लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें। “ॐ गं गणपतये नमः” बोलकर उन्हें समर्पित करें। बिना गणेश पूजा के शिव पूजा अधूरी मानी जाती है।

स्टेप 4: संकल्प

हाथ में जल लेकर मन ही मन कहें- “हे महादेव, मैं (अपना नाम) आज आपकी पूजा कर रहा हूँ/रही हूँ। इसे स्वीकार करें और मेरे परिवार पर कृपा करें।” जल छोड़ दें।

स्टेप 5: शिवलिंग अभिषेक

अब शिवलिंग को एक थाली में रखें।
सबसे पहले जल चढ़ाएं।
फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से बारी-बारी अभिषेक करें।
हर बार “ॐ नमः शिवाय” बोलते रहें।
अंत में फिर से साफ जल से शिवलिंग को धोएं।

महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि

स्टेप 6: श्रृंगार और भोग

शिवलिंग को पोंछकर चंदन का तिलक लगाएं। बेलपत्र (चिकना हिस्सा नीचे की तरफ), धतूरा और फूल चढ़ाएं। भस्म अर्पित करें। अंत में फल या मिठाई का भोग लगाएं।

स्टेप 7: आरती

कपूर या घी के दीपक से शिव जी की आरती करें और अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।

रात्रि के चारों प्रहर की पूजा कैसे करें

जो लोग पूरी रात जागते हैं (जागरण करते हैं), उनके लिए पूजा चार हिस्सों में होती है। इसे बहुत सरल तरीके से समझें:

पहला प्रहर (शाम): इस समय दूध से अभिषेक करने का महत्व है।

दूसरा प्रहर (रात): इस समय दही से अभिषेक करें।

तीसरा प्रहर (मध्यरात्रि): इस समय घी से अभिषेक करें।

चौथा प्रहर (भोर/सुबह): इस समय शहद से अभिषेक करें।

अगर आप चारों प्रहर अलग-अलग पूजा नहीं कर सकते, तो ‘निशिता काल’ (रात 12 बजे के आसपास) में एक बार मुख्य पूजा कर लेना ही पर्याप्त है।

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएँ और क्या नहीं चढ़ाना चाहिए

अक्सर जानकारी के अभाव में हम वो चीजें चढ़ा देते हैं जो शिव जी को अप्रिय हैं। इसका विशेष ध्यान रखें:

महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि

ये चीजें जरूर चढ़ाएं:

बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल, भस्म, चंदन, रुद्राक्ष, गंगाजल।

ये चीजें भूलकर भी न चढ़ाएं:

  • तुलसी: शिव पूजा में तुलसी वर्जित है (यह भगवान विष्णु को प्रिय है)।
  • हल्दी: हल्दी सौंदर्य का प्रतीक है और शिव वैरागी हैं, इसलिए शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ती (जलाधारी पर माता पार्वती के लिए चढ़ा सकते हैं)।
  • सिंदूर/कुमकुम: यह सुहाग का प्रतीक है, इसे शिवलिंग पर नहीं बल्कि माता पार्वती की मूर्ती पर चढ़ाएं।
  • केतकी का फूल: इसे शिव पूजा में शापित माना गया है।
  • शंख से जल: शिव जी ने शंखचूड़ दैत्य का वध किया था, इसलिए शंख से उन पर जल नहीं चढ़ाया जाता।

पूजा के बाद क्या करें? (दान‑पुण्य आदि)

  • पूजा समाप्त होने के बाद सीधे सो न जाएं।
  • क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।
  • दान: अगले दिन (16 फरवरी) व्रत खोलने से पहले किसी जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र या कुछ दक्षिणा दान करें। शिव जी दानी लोगों से बहुत प्रसन्न होते हैं।
  • पारण: सही समय पर (सूर्योदय के बाद) व्रत खोलें। व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान को चढ़ाया हुआ प्रसाद ग्रहण करें।

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FAQ – आम प्रश्न

प्रश्न: क्या महिलाएं शिवलिंग को छू सकती हैं?
उत्तर: जी हाँ, बिल्कुल। यह एक भ्रांति है कि महिलाएं शिवलिंग नहीं छू सकतीं। माता पार्वती ने स्वयं शिव पूजा की थी। आप पूरी श्रद्धा से शिवलिंग का अभिषेक कर सकती हैं।

प्रश्न: अगर मासिक धर्म (Periods) आ जाए तो क्या करें?
उत्तर: ऐसी स्थिति में आप व्रत रख सकती हैं (मानसिक व्रत), लेकिन शारीरिक रूप से पूजा-पाठ या मूर्ति स्पर्श से बचें। आप मन में मंत्र जाप कर सकती हैं या घर के किसी अन्य सदस्य से अपने नाम की पूजा करवा सकती हैं।

प्रश्न: क्या महाशिवरात्रि पर काले कपड़े पहन सकते हैं?
उत्तर: पूजा में काला रंग शुभ नहीं माना जाता। कोशिश करें कि लाल, पीले, हरे या सफेद रंग के वस्त्र पहनें।

प्रश्न: क्या बीमार व्यक्ति को निर्जला व्रत रखना जरूरी है?
उत्तर: नहीं, शिव जी भाव के भूखे हैं। यदि आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो आप फलाहार और दवाइयां लेकर व्रत करें। शरीर को कष्ट देकर की गई पूजा भगवान को प्रिय नहीं होती।

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