लोहड़ी 2026 की पूजा कैसे करें ? लोहड़ी की सम्पूर्ण जानकारी

लोहड़ी 2026:भारत के उत्तर क्षेत्र में सर्दियों के अंत और नई फसल के स्वागत का संदेश देने वाला पर्व लोहड़ी उल्लास, लोकगीतों और परंपराओं से भरपूर होता है। आग की ली के चारों ओर इकट्ठा होकर गाए जाने वाले गीत, नृत्य और पारंपरिक प्रसाद इस पर्व को खास बनाते हैं। लोहड़ी न केवल फसल से जुड़ा त्योहार है, बल्कि यह सामूहिक आनंद, कृतज्ञता और नई शुरुआत का प्रतीक भी मानी जाती है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में लोहड़ी कब मनाई जाएगी, इसके शुभ मुहूर्त, महत्व और इससे जुड़ी परंपराएँ।

लोहड़ी 2026

लोहड़ी का त्योहार हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह त्योहार तरह-तरह के फसलों से जुड़ा है और साल 2026 में 13 जनवरी को मनाया जाएगा।

लोहड़ी 13 जनवरी 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।

लोहडी संक्रान्ति का क्षण 03:13 पी एम, जनवरी 14

मकर संक्रान्ति 14 जनवरी, 2026, बुधवार को

इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त

04:59 ए एम से 05:52 ए एम

प्रातः सन्ध्या 05:26 ए एम से 06:45 ए एम

अभिजित मुहूर्त 11:45 ए एम से 12:28 पी एम

विजय मुहूर्त

01:54 पी एम से 02:37 पी एम

गोधूलि मुहूर्त

05:25 पी एम से 05:52 पी एम

सायाह्न सन्ध्या

05:28 पी एम से 06:48 पी एम

अमृत काल 02:12 पी एम से 04:00 पी एम

निशिता मुहूर्त 11:40 पी एम से 12:33 ए एम, जनवरी 14

कब और कहां मनाई जाती है लोहड़ी ?

लोहड़ी भारत के सभी प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो हर साल जनवरी महीने में मनाई जाती है। लोहड़ी का पर्व हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पहले, अर्थात् 13 जनवरी को मनाया जाता है। यह त्योहार शीत ऋतु के अंत और फसल के पकने की खुशी का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से यह पर्व पौष और माघ के महीने के बीच में होता है। इस ऋतु के दौरान खेतों में गेहूं और सरसों की फलदार फसल नजर आती है और यह खासकर पंजाब के साथ जुड़ा हुआ है।

लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाब में बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाई जाती है। इसके साथ ही यह पर्व हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी परंपरागत रूप से मनाया जाता है। जहां-जहां पंजाबी समुदाय रहता है, वहां लोहड़ी सामाजिक उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है।

क्यों मनाते हैं लोहड़ी ?

लोहड़ी मुख्य रूप से फसल और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। यह त्योहार रबी की फसल के पकने की खुशी में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोहड़ी के माध्यम से लोग अग्नि देवता और सूर्य देव की आराधना करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि आने वाला वर्ष उपज, सुख-समृद्धि और खुशहाली से भरा रहे।

लोहड़ी को ठंड के अंत और नए मौसम की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन अलाव जलाकर उसमें तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी और लावा अर्पित किए जाते हैं, जो बुराइयों के त्याग और नई ऊर्जा के स्वागत का संकेत माने जाते है। साथ ही, यह पर्व सामाजिक मेल-मिलाप, पारिवारिक एकता और लोक परंपराओं को सहेजने का भी माध्यम है।

लोहड़ी कौन लोग मनाते हैं?

लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाबी समुदाय द्वारा मनाई जाती है। विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में यह पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इसके अलावा, जहां-जहां पंजाबी लोग निवास करते है चाहे भारत में हों या विदेशों में वहां भी लोहड़ी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है। खासतौर पर जिन घरों में नवविवाह, संतान जन्म या परिवार में कोई शुभ अवसर हुआ हो, वहां लोहड़ी का उत्सव और भी धूमधाम से मनाने की परंपरा है।

लोहड़ी पर्व का महत्व

लोहड़ी का पर्व भारतीय संस्कृति में आस्था, प्रकृति और परंपरा का सुंदर संगम माना जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से फसल, सूर्य और अग्नि देवता को समर्पित है। लोहडी के माध्यम से लोग ईश्वर का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने उन्हें भरपूर अन्न और समृद्ध जीवन प्रदान किया।

यह पर्व ठंड के मौसम के अंत और सूर्य के उत्तरायण की तैयारी का संकेत देता है। मान्यता है कि लोहड़ी की अग्नि में आहुति देने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है। लोहड़ी का सामाजिक महत्व भी अत्यंत विशेष है। यह त्योहार पारिवारिक एकता, भाईचारे और सामूहिक उत्सव को बढ़ावा देता है। लोग एकत्र होकर लोकगीत गाते हैं, भांगड़ा-गिद्धा करते हैं और पारंपरिक प्रसाद साझा करते है, जिससे आपसी प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।

इसके अलावा, लोहड़ी को नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। नवविवाहित दंपतियों और नवजात शिशुओं के लिए पहली लोहड़ी विशेष महत्व रखती है, जिसे शुभता और मंगलकामनाओं के साथ मनाया जाता है। इस प्रकार, लोहड़ी न केवल एक त्योहार है, बल्कि भारतीय संस्कृति में आनंद, कृतज्ञता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है।

कैसे मनाया जाता है लोहड़ी का यह पर्व

लोहड़ी लोगों को आनंदित करने और एक दूसरे से जोड़ने का काम करती है। इसके 10 दिन पहले से ही बच्चे टोलियों में घर-घर घूमते हुए लोगों से लकड़ी, रेवडी, तेल, मूंगफली, लावा आदि चीजें मांगते हैं। अब अगर लोहड़ी के समय किसी के घर में नई-नई शादी हुई हो या नए बच्चे का आगमन हुआ हो, तो उस घर में और भी धूमधाम से यह त्योहार मनाया जाता है।

लोहड़ी 2026

लोहड़ी के लिए चीजें मांगते वक्त बच्चे जोर-जोर से इससे जुड़े लोकगीत गाते हुए घूमते हैं, जिसमें पंजाब के नायक दुल्ला भाटी का जिक्र मिलता है। यह पंजाब के वह नायक थे, जिन्होंने मुगलों के खिलाफ खड़े होकर कई सारी बच्चियों को गुलाम बनने से बचाया और उनकी शादी की पूरी जिम्मेदारी भी खुद ली। मगर इसकी असली रौनक शाम के बाद शुरू होती है, जहां पूरा परिवार और रिश्तेदार एक खाली मैदान में बैठकर लकड़िया जलाते हैं फिर उसे घेर कर बैठते हैं। इस आग के चारों ओर लोकगीत गाए जाते हैं और नृत्य किया जाता है। फिर लोग आग के चारों ओर बैठकर रेवड़ी, मिठाईया, मूंगफली, लावा आदि का प्रसाद की तरह सेवन भी करते हैं।

लोहड़ी पूजा की पूजन सामग्री

लोहड़ी के दिन अग्नि देवता की पूजा कर सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की जाती है। पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री उपयोग में लाई जाती है –

लकड़ी या उपले (लोहड़ी की आग के लिए)

रेवड़ी

मूंगफली

तिल

लावा (फुले हुए चावल)

गुड़

मक्के के दाने या मक्का

तिल के लड्डू

कच्चे चावल

फूल

जल से भरा लोटा

अगरबत्ती और दीपक

लोहड़ी 2026 की पूजा कैसे करें ?

लोहड़ी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर की साफ-सफाई करें।

सायंकाल शुभ समय में खुले स्थान पर लकड़ी या उपलों से अग्नि प्रज्वलित करें।

अग्नि को प्रणाम कर हाथ में जल लेकर संकल्प लें और अच्छी फसल, सुख-समृ‌द्धि व परिवार की खुशहाली की कामना करें।

अब अग्नि में रेवड़ी, मूंगफली, तिल, गुड़, लावा और मक्के के दाने अर्पित करें।

अग्नि की परिक्रमा करते हुए लोकगीत गाएं और “आदर आए, दिलाथर जाए” जैसे पारंपरिक मंत्रों का उच्चारण करें।

पूजा के पश्चात प्रसाद को सभी परिवारजनों और उपस्थित लोगों में वितरित करें।

अंत में अग्नि देवता का धन्यवाद करें और बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त करें।

इस प्रकार श्रद्धा और परंपरा के अनुसार की गई लोहडी पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और खुशहाली का वास होता है।

लोहड़ी पर्व के दिन क्या करें ?

लोहड़ी का पर्व खुशहाली, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन कुछ विशेष कार्य करने से पर्व का पुण्य और फल कई गुना बढ़ जाता है –

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर की साफ-सफाई करें।

शाम के समय परिवार और पड़ोसियों के साथ मिलकर लोहड़ी की अग्नि प्रज्वलित करें।

अग्नि देवता को रेवड़ी, मूंगफली, तिल, गुड़, लावा और मक्के के दाने अर्पित करें।

अग्नि की परिक्रमा करते हुए सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना करें।

बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।

लोकगीत गाएं, पारंपरिक नृत्य करें और सभी के साथ प्रसाद साझा करें।

यदि घर में नवविवाहित दंपति या नवजात शिशु हो, तो विशेष रूप से लोहड़ी मनाएं।

लोहड़ी के दिन क्या न करें ?

लोहड़ी के दिन कुछ कार्यों से परहेज करना भी शुभ माना जाता है-

इस दिन आपसी कलह, वाद-विवाद या नकारात्मक बातों से दूर रहे।

किसी का अपमान न करें और क्रोध पर नियंत्रण रखें।

अग्नि में प्लास्टिक, कूड़ा-कचरा या अशुद्ध वस्तुएं न डालें।

बड़ों और परंपराओं का अनादर न करें।

जरूरतमंदों की अनदेखी न करें, दान-पुण्य से पीछे न हटें।

दिन भर आलस्य में न बिताएं, पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाएं। लोहड़ी का पर्व सकारात्मक सोच, आपसी प्रेम और सामूहिक आनंद का संदेश देता है। इस दिन सही आचरण और श्रद्धा से किया गया हर कार्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है।

लोहड़ी से जुड़ी मान्यताएं

लोहड़ी पर्व से कई प्राचीन धार्मिक और लोक मान्यताएं जुड़ी हुई है, जो इस त्योहार को विशेष बनाती है-

मान्यता है कि लोहड़ी की अग्नि में अर्पित की गई सामग्री अग्नि देवता के माध्यम से सूर्य देव तक पहुंचती है, जिससे खेतों में अच्छी फसल होती है।

कहा जाता है कि लोहड़ी की आग में तिल, गुड़ और लावा अर्पित करने से परिवार में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

लोक मान्यता के अनुसार, लोहड़ी की रात नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।

जिन घरों में हाल ही में विवाह हुआ हो या नवजात शिशु का जन्म हुआ हो, वहां पहली लोहड़ी विशेष रूप से मनाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

यह भी विश्वास है कि लोहड़ी के दिन दान-पुण्य करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और आने वाला वर्ष उन्नति से भरपूर रहता है।

लोहड़ी पर्व से जुड़ी विशेष बातें

लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।

यह पर्व रबी की फसल के आगमन और नई ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है।

लोहड़ी की संध्या पर परिवार और समाज के लोग एकत्र होकर सामूहिक रूप से पर्व मनाते हैं, जिससे आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ता है।

इस दिन दुल्ला भट्टी से जुड़े लोकगीत गाए जाते है, जो साहस और समाज सेवा का संदेश देते हैं।

लोहड़ी के साथ ही मकर संक्रांति और उत्तरायण का स्वागत किया जाता है, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।

यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक माना जाता है।

लोहडी पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, परंपराओं के सम्मान और सामूहिक उल्लास का महत्व सिखाता है।

लोहड़ी से जुड़ी प्रथाएं

लोहड़ी से जुड़ी कुछ मान्यताएं भी है, जिसका पालन हमेशा से किया जाता है। इसमें विवाहित महिलाओं के मायके से नए कपड़े, फल-मिठाई आदि चीजें भेजे जाने का रिवाज है। सिर्फ इतना ही नहीं शाम के वक्त पारंपरिक कपड़े पहने जाते हैं और जब लोहड़ी की आग लगभग खत्म होने की कगार पर होती है, तब उसमें से कुछ कोयले चुनकर अपने घर में ले जाने की प्रथा है। ऐसा माना जाता है, कि इससे धन और सौभाग्य के साथ समृद्धि भी आपके साथ घर आती है।

तो यह थी लोहड़ी की सम्पूर्ण जानकारी। हमें उम्मीद है, कि आपको यह अच्छी लगी होगी। अगर आप आगे भी ऐसी ही धर्म से जुड़ी जानकारियों और विशेष त्योहारों से अवगत होना चाहते हैं तो बने रहिए धार्मिक सुविचार के साथ।

और पढ़ें ↘️

लोहड़ी 2026 कब है (Lohri 2026 Kab Hai): जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त और आध्यात्मिक महत्व

Leave a Comment