एकादशी व्रत महागाइड 2026: तिथियां, कथा, नियम और आज का पंचांग

सनातन संस्कृति में समय की गणना केवल घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि तिथियों और नक्षत्रों से होती है। इन तिथियों में सबसे श्रेष्ठ, सबसे पवित्र और पापों का नाश करने वाली तिथि मानी जाती है—एकादशी (Ekadashi)। इसे आम बोलचाल की भाषा में ‘ग्यारस’ (Gyaras) भी कहा जाता है।

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जैसे ही हम वर्ष 2025 के अंतिम पड़ाव पर खड़े हैं, भक्तों के मन में उत्साह भी है और जिज्ञासा भी। आज जब आप यह लेख पढ़ रहे हैं, तो कैलेंडर में तारीख है—30 December 2025। यह दिन सामान्य नहीं है, बल्कि एक अत्यंत शुभ संयोग लेकर आया है। आज साल की आखिरी और सबसे फलदायी एकादशी है।

इस विस्तृत लेख में हम न केवल Putrada Ekadashi 2025 के बारे में विस्तार से बात करेंगे, बल्कि आने वाले साल 2026 Ke According एकादशी का पूरा कैलेंडर, व्रत के नियम, वैज्ञानिक कारण और पौराणिक कथाओं की गहराई में भी जाएंगे।

भाग 1: आज का विशेष महत्व (30 December 2025)

आज कौन सी तिथि है? (Aaj Kya Tithi Hai)

अक्सर सुबह उठते ही हमारे मन में सवाल आता है कि Aaj Ka Panchang क्या कहता है? अगर आप 30 दिसंबर 2025 को यह लेख पढ़ रहे हैं, तो आपको बता दें कि आज पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। शास्त्रों में इसे पौष पुत्रदा एकादशी (Paush Putrada Ekadashi) के नाम से जाना जाता है।

यह साल 2025 का अंतिम व्रत है। जो लोग इंटरनेट पर सर्च कर रहे हैं कि December Mein Ekadashi Kab Hai, उनके लिए उत्तर यही है—आज ही वह पुण्यकारी दिन है।

आज का पंचांग (30 December 2025 Panchang)

किसी भी व्रत की सफलता उसके सही समय और मुहूर्त पर निर्भर करती है। आज की स्थिति इस प्रकार है:

  • तारीख: 30 दिसंबर 2025
  • दिन: मंगलवार
  • तिथि: एकादशी (शुक्ल पक्ष)
  • एकादशी का नाम: पुत्रदा एकादशी
  • महत्व: यह व्रत संतान प्राप्ति, संतान की रक्षा और अकाल मृत्यु के भय को समाप्त करने के लिए किया जाता है।
    सूर्य और चंद्रमा: आज के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं की ओर अग्रसर होता है, जिससे मन की एकाग्रता बढ़ती है।

भाग 2: एकादशी क्या है और हम व्रत क्यों रखते हैं?

इससे पहले कि हम Ekadashi Vrat 2026 की लिस्ट देखें, यह समझना जरूरी है कि आखिर यह व्रत इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

पौराणिक महत्व (Mythological Significance)

पद्म पुराण के अनुसार, एकादशी कोई साधारण तिथि नहीं है, बल्कि यह एक देवी हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु के शरीर से एक शक्ति प्रकट हुई थी, जिसने ‘मुर’ नामक दानव का वध किया था। उस शक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें ‘एकादशी’ नाम दिया और वरदान दिया कि जो भी इस तिथि पर अन्न का त्याग कर मेरा स्मरण करेगा, उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे बैकुंठ की प्राप्ति होगी। इसलिए कहा जाता है— “न किञ्चित् एकादशी समम्” (एकादशी के समान कोई दूसरा व्रत नहीं है)।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Reason)

सिर्फ धर्म ही नहीं, विज्ञान भी एकादशी व्रत का समर्थन करता है। हमारे शरीर में 70% से अधिक जल है। चंद्रमा का प्रभाव जल पर सबसे अधिक पड़ता है (जैसे समुद्र में ज्वार-भाटा)। एकादशी और पूर्णिमा के आसपास चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बढ़ जाता है, जिससे हमारे शरीर के तरल पदार्थों में हलचल होती है। यह मन की चंचलता और रोगों को बढ़ा सकता है।

एकादशी के दिन उपवास (Fasting) करने से शरीर का सिस्टम डिटॉक्स होता है, पाचन तंत्र को आराम मिलता है और मन स्थिर रहता है। इसलिए Gyaras का व्रत मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए संजीवनी है।

भाग 3: एकादशी व्रत कैलेंडर 2026 (Ekadashi Vrat List 2026)

अब जब हम 2025 को विदा कर रहे हैं, तो यह सही समय है कि हम आने वाले वर्ष 2026 की योजना बनाएं। भक्त अक्सर पूछते हैं कि Ekadashi Kab Ki Hai या अगली ग्यारस कब आएगी।

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नीचे वर्ष 2026 का सम्पूर्ण विवरण दिया गया है। यह लिस्ट 100% Trusted Accurate पंचांग गणनाओं पर आधारित है।

जनवरी 2026 (January)

वर्ष की शुरुआत पवित्रता के साथ होगी।
षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi): 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
महत्व: इस दिन तिल का दान और प्रयोग छह प्रकार से किया जाता है। यह पापों का नाश करती है।

जया एकादशी (Jaya Ekadashi): 29 जनवरी 2026 (गुरुवार)
महत्व: इसे ‘भीष्म एकादशी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह व्रत करने से व्यक्ति को कभी पिशाच योनि में नहीं जाना पड़ता।

फरवरी 2026 (February)

विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi): 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)
महत्व: जैसा नाम वैसा काम। किसी भी कार्य में विजय प्राप्ति या शत्रुओं पर जीत के लिए यह व्रत रखा जाता है। भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई से पहले यह व्रत किया था।

आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi): 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार)
महत्व: यह होली से पहले आती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है।

मार्च 2026 (March)

पापमोचिनी एकादशी (Papmochini Ekadashi): 14 मार्च 2026 (शनिवार)
महत्व: यह साल की अंतिम एकादशी (विक्रम संवत के अनुसार) मानी जाती है जो अनजाने में किए गए पापों को धो देती है।

कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi): 29 मार्च 2026 (रविवार)
महत्व: यह चैत्र नवरात्रि के बाद आती है और नए हिंदू वर्ष की पहली एकादशी होती है। यह सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली है।

अप्रैल 2026 (April)

वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi): 13 अप्रैल 2026 (सोमवार)
महत्व: इस व्रत को करने से कन्या दान और हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर फल मिलता है।

मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi): 27 अप्रैल 2026 (सोमवार)
महत्व: समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने इसी दिन मोहिनी रूप धारण किया था। यह मोह-माया के बंधन से मुक्ति दिलाती है।

मई 2026 (May)

अपरा एकादशी (Apara Ekadashi): 12 मई 2026 (मंगलवार)
महत्व: इसे अचला एकादशी भी कहते हैं। यह अपार धन और कीर्ति प्रदान करती है।

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi): 27 मई 2026 (बुधवार)
विशेष: यह साल की सबसे बड़ी और कठिन एकादशी है। इसमें पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। मान्यता है कि अगर आप साल भर की कोई भी एकादशी नहीं कर पाते, तो मात्र निर्जला एकादशी करने से आपको सभी 24 एकादशियो का फल मिल जाता है।

जून 2026 (June)

योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi): 10 जून 2026 (बुधवार)
महत्व: यह त्वचा रोगों से मुक्ति दिलाती है और पापों का शमन करती है।

देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi): 25 जून 2026 (गुरुवार)
महत्व: इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने (चातुर्मास) के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दिन से शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।

जुलाई 2026 (July)

कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi): 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार)
महत्व: सावन माह की यह एकादशी भगवान शिव और विष्णु दोनों की कृपा दिलाती है।

सावन पुत्रदा एकादशी (Shravan Putrada Ekadashi): 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार)
महत्व: साल में दो पुत्रदा एकादशी होती हैं, एक पौष में (जो आज 30 दिसंबर 2025 को है) और दूसरी सावन में।

अगस्त 2026 (August)

अजा एकादशी (Aja Ekadashi): 8 अगस्त 2026 (शनिवार)
महत्व: राजा हरिश्चंद्र ने अपना खोया हुआ राज्य और परिवार इसी व्रत के प्रभाव से पुनः प्राप्त किया था।

परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi): 23 अगस्त 2026 (रविवार)
महत्व: मान्यता है कि चातुर्मास की योगनिद्रा के दौरान भगवान विष्णु इसी दिन करवट बदलते हैं। इसे जलझूलनी एकादशी भी कहते हैं।

सितंबर 2026 (September)

इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi): 7 सितंबर 2026 (सोमवार)
महत्व: यह पितृ पक्ष (श्राद्ध) में आती है। इस व्रत का पुण्य अपने पितरों को देने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पद्मिनी / पार्श्व एकादशी (Parsva Ekadashi): 21 सितंबर 2026 (सोमवार)

अक्टूबर 2026 (October)

रमा एकादशी (Rama Ekadashi): 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)
महत्व: यह दिवाली से कुछ दिन पहले आती है। माँ लक्ष्मी (रमा) के नाम पर होने के कारण यह सुख-समृद्धि देती है।

पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi): 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)
महत्व: यह एकादशी मनुष्य को यमलोक की यातनाओं से बचाती है।

नवंबर 2026 (November)

रंभा एकादशी (Rambha Ekadashi): 5 नवंबर 2026 (गुरुवार)

देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi): 19 नवंबर 2026 (गुरुवार)

विशेष: इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने बाद जागते हैं। इसी दिन तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) होता है और शादियों का सीजन फिर से शुरू होता है।

दिसंबर 2026 (December)

उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi): 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार)
महत्व: इसी दिन एकादशी देवी का जन्म हुआ था। जो लोग एकादशी व्रत शुरू करना चाहते हैं, उन्हें इसी दिन से शुरुआत करनी चाहिए।

मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi): 19 दिसंबर 2026 (शनिवार)
विशेष: इसी दिन कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, इसलिए इसे गीता जयंती (Gita Jayanti) भी कहते हैं।

भाग 4: एकादशी व्रत विधि और नियम (Do’s and Don’ts)

बहुत से लोग पूछते हैं कि Ekadashi Vrat Kaise Kare या इसके कड़े नियम क्या हैं। यहाँ हम आपको सरल विधि बता रहे हैं।
व्रत के नियम (Rules)

चावल निषेध: एकादशी के दिन चावल खाना “महापाप” माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि मेधा के शरीर के अंगों ने धरती में समाकर चावल का रूप ले लिया था, इसलिए इस दिन चावल खाना मांस खाने के समान माना गया है।

दशमी से तैयारी: व्रत की शुरुआत एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही हो जाती है। दशमी की रात को भोजन सात्विक होना चाहिए और दाल या भारी भोजन नहीं करना चाहिए।

अन्न का त्याग: निर्जला को छोड़कर बाकी एकादशियों में आप फलाहार (फल, दूध, कुट्टू का आटा, सिंघाड़ा, मूंगफली) ले सकते हैं।
निंदा और क्रोध से बचें: व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि विचारों की शुद्धता भी है। इस दिन किसी की बुराई न करें और गुस्सा न करें।

पूजा विधि (Puja Process)

  • सुबह: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • संकल्प: हाथ में जल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें— “हे प्रभु! आज मैं एकादशी का व्रत रखूँगा/रखूँगी। इसे निर्विघ्न पूरा करने की शक्ति दें।”
  • स्थापना: घर के मंदिर में भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।
  • भोग: भगवान को तुलसी दल, पंचामृत और पीले फल अर्पित करें। ध्यान रहे, भगवान विष्णु बिना तुलसी के भोग स्वीकार नहीं करते।
  • कथा: जिस एकादशी का व्रत है, उसकी Vrat Katha पढ़ना या सुनना अनिवार्य है।
  • मंत्र: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें।

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पारण (व्रत खोलने का समय)

एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि (अगले दिन) को सूर्योदय के बाद होता है। इसे पारण (Parana) कहते हैं। व्रत कभी भी द्वादशी समाप्त होने से पहले खोल लेना चाहिए, नहीं तो व्रत का फल नहीं मिलता।

भाग 5: पुत्रदा एकादशी व्रत कथा (Putrada Ekadashi Vrat Katha)

चूंकि आज Putrada Ekadashi (30 दिसंबर 2025) है, तो इसकी कथा जानना आज के लिए सबसे प्रासंगिक है।
प्राचीन काल में भद्रावती नगरी में सुकेतुमान नाम का एक राजा राज्य करता था। उसके पास धन-दौलत, हाथी-घोड़े और विशाल राज्य था, लेकिन वह हमेशा उदास रहता था। कारण यह था कि उसकी कोई संतान नहीं थी। उसे और उसकी रानी शैव्या को हमेशा यही चिंता सताती थी कि उनके मरने के बाद उनका पिंड-दान कौन करेगा?

दुखी होकर एक दिन राजा वन की ओर चला गया। जंगल में भटकते-भटकते वह एक सरोवर के पास पहुँचा, जहाँ कुछ ऋषि-मुनि वेद पाठ कर रहे थे। राजा ने उन्हें प्रणाम किया और अपनी व्यथा बताई।

ऋषियों ने कहा, “हे राजन! आज पौष शुक्ल एकादशी है, जिसे ‘पुत्रदा एकादशी‘ कहते हैं। यह तिथि साक्षात् भगवान नारायण का स्वरूप है। तुम और तुम्हारी पत्नी श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करो, भगवान विष्णु तुम्हारी सूनी गोद अवश्य भरेंगे।”

ऋषियों के कहे अनुसार राजा ने उसी दिन विधि-विधान से व्रत रखा और द्वादशी को पारण किया। कुछ समय पश्चात रानी गर्भवती हुईं और उन्होंने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया।

इसलिए, जो भी निःसंतान दंपति आज के दिन (30 Dec 2025) यह व्रत रखते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।

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Paush Putrada Ekadashi 2025: पौष पुत्रदा एकादशी 2025 की तिथि ,व्रत मुहूर्त और महत्व

 

भाग 6: आपके सवालों के जवाब (FAQ):

हमने आपके द्वारा पूछे गए सभी मुख्य सवालों को यहाँ संकलित किया है:

Q1: आज एकादशी है क्या (Aaj Ekadashi Hai Kya)?
उत्तर: जी हाँ, आज 30 दिसंबर 2025 को पौष पुत्रदा एकादशी है।

Q2: 2025 में दिसंबर में एकादशी कब है (December Ekadashi 2025)?
उत्तर: दिसंबर 2025 में दो एकादशियां थीं। पहली मोक्षदा एकादशी (जो निकल चुकी है) और दूसरी आज 30 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी है।

Q3: ग्यारस कब है (Gyaras Kab Hai)?
उत्तर: आज 30 दिसंबर को ग्यारस है। इसके बाद अगली ग्यारस 2026 में 14 जनवरी को (षटतिला एकादशी) आएगी।

Q4: एकादशी व्रत कब है (Ekadashi Vrat Kab Hai)?
उत्तर: एकादशी का व्रत हर महीने में दो बार आता है—एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। 2026 की पूरी लिस्ट ऊपर लेख में दी गई है।

Q5: पुत्रदा एकादशी 2025 का पारण कब करें?
उत्तर: 30 दिसंबर को व्रत रखने वाले भक्त 31 दिसंबर 2025 की सुबह सूर्योदय के बाद पारण कर सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

मित्रों, एकादशी का व्रत (Ekadashi Vrat) केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक दिव्य माध्यम है। चाहे आप Putrada Ekadashi 2025 का व्रत आज कर रहे हों या 2026 के व्रतों की तैयारी कर रहे हों, सबसे महत्वपूर्ण है ‘भाव’।
भगवान विष्णु को छप्पन भोग की जरूरत नहीं है, वे तो केवल सच्चे मन और तुलसी दल से प्रसन्न हो जाते हैं। 30 दिसंबर 2025 का यह दिन आपको और आपके परिवार को सुख, समृद्धि और आरोग्य प्रदान करे, यही कामना है।

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बोलिए श्री हरि विष्णु की जय!

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