Dattatreya Jayanti 2025 (दत्तात्रेय जयंती): जानें तिथि, मुहूर्त और त्रिदेवों की कृपा पाने की सम्पूर्ण विधि

Dattatreya Jayanti 2025 (दत्तात्रेय जयंती): त्रिदेवों की कृपा का महापर्व, जानें तिथि, मुहूर्त और सम्पूर्ण पूजन विधि

जब हृदय में भक्ति का सागर उमड़ता है और आत्मा अपने गुरु को पुकारती है, तब प्रकृति भी उत्सव मनाती है। एक ऐसा ही दिव्य उत्सव है भगवान दत्तात्रेय का जन्मोत्सव, जिसे हम सब Dattatreya Jayanti (दत्तात्रेय जयंती) के रूप में मनाते हैं। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ज्ञान, करुणा और वैराग्य के उस संगम का प्रतीक है, जो भगवान दत्तात्रेय के स्वरूप में साकार हुआ। आपके मन में भी यह प्रश्न उठ रहा होगा कि Dattatreya Jayanti 2025 kab hai (दत्तात्रेय जयंती 2025 कब है)? आइए, इस आध्यात्मिक यात्रा में हम साथ चलें और इस महापर्व के हर पहलू को हृदय से महसूस करें।

Dattatreya Jayanti 2025 kab hai

यह वह दिन है जब त्रिदेवों – ब्रह्मा, विष्णु और महेश – ने एक साथ महर्षि अत्रि और महासती अनुसूया के पुत्र के रूप में अवतार लिया। भगवान दत्तात्रेय को ‘गुरुदेव दत्त’ और ‘आदिगुरु’ भी कहा जाता है, क्योंकि वे गुरु-शिष्य परंपरा के प्रणेता हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा ज्ञान किसी एक स्रोत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सृष्टि ही हमारी गुरु है।

Dattatreya Jayanti 2025 (दत्तात्रेय जयंती 2025): तिथि और शुभ मुहूर्त

प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि को भगवान दत्तात्रेय का जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पंचांग की गणना के अनुसार, Dattatreya Jayanti 2025 (दत्तात्रेय जयंती 2025) की तिथि और मुहूर्त इस प्रकार हैं:

* दत्तात्रेय जयंती तिथि: गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

* पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 4 दिसंबर 2025, सुबह 08:37 बजे से

* पूर्णिमा तिथि का समापन: 5 दिसंबर 2025, सुबह 04:43 बजे तक

इस शुभ दिन पर, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करना और फिर दिन भर भगवान दत्तात्रेय की भक्ति में लीन रहना अत्यंत फलदायी माना जाता है। सुबह से लेकर मध्याह्न तक का समय पूजा-अर्चना के लिए विशेष रूप से शुभ है।

कौन हैं भगवान दत्तात्रेय? त्रिदेवों का संयुक्त अवतार

भगवान दत्तात्रेय की कथा केवल एक पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि यह पतिव्रता धर्म, निश्छल भक्ति और त्रिदेवों की करुणा का जीवंत प्रमाण है। वे महर्षि अत्रि और देवी अनुसूया के पुत्र हैं। माता अनुसूया का सतीत्व इतना प्रबल था कि उनकी ख्याति तीनों लोकों में फैल गई।

एक बार, देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती ने माता अनुसूया की परीक्षा लेने का निश्चय किया। उन्होंने अपने पतियों, ब्रह्मा, विष्णु और महेश को साधु वेश में अनुसूया के पास भिक्षा मांगने भेजा। त्रिदेवों ने अनुसूया के समक्ष एक विचित्र शर्त रखी – कि वे उन्हें निर्वस्त्र होकर भिक्षा दें।

एक पल के लिए तो माता अनुसूया दुविधा में पड़ गईं, पर उन्होंने अपने पतिव्रता धर्म के बल पर अपने पति का ध्यान किया और अपने तपोबल से उन तीनों साधुओं को छोटे-छोटे शिशुओं में बदल दिया। फिर उन्होंने एक माँ की तरह वात्सल्य भाव से उन्हें दूध पिलाया। जब बहुत समय तक त्रिदेव वापस नहीं लौटे, तो तीनों देवियाँ चिंतित होकर माता अनुसूया के पास पहुँचीं और क्षमा याचना करते हुए अपने पतियों को वापस मांगा।

माता अनुसूया ने उन्हें उनका मूल स्वरूप प्रदान किया। त्रिदेव माता अनुसूया के सतीत्व और वात्सल्य से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने वरदान स्वरूप उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने का वचन दिया। उन्हीं त्रिदेवों के संयुक्त अंश से भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ, जिनके तीन मुख और छह भुजाएं हैं। यह तीन मुख ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं और छह भुजाएं उनके शस्त्रों और शक्तियों को दर्शाती हैं।

Dattatreya Jayanti 2025 kab hai (दत्तात्रेय जयंती 2025 कब है) और इसका आध्यात्मिक महत्व

जब हम पूछते हैं कि Dattatreya Jayanti 2025 kab hai (दत्तात्रेय जयंती 2025 कब है), तो हम केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं खोज रहे होते। हम उस अवसर को खोज रहे होते हैं जब हम अपने भीतर के गुरु तत्व को जाग्रत कर सकें।

* गुरु तत्व की जागृति: भगवान दत्तात्रेय को ‘आदिगुरु’ माना जाता है। उनकी पूजा करने से साधक को सही मार्ग दिखाने वाले गुरु की प्राप्ति होती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

* त्रिदेवों का आशीर्वाद: दत्तात्रेय की उपासना करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है। इससे जीवन में सृजन (ब्रह्मा), संतुलन (विष्णु) और संहार (नकारात्मकता का नाश – शिव) का आशीर्वाद मिलता है।

* ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति: भगवान दत्तात्रेय ज्ञान के सागर हैं। उनकी जयंती पर की गई साधना से अज्ञान का अंधकार मिटता है और मन में वैराग्य का भाव उत्पन्न होता है, जो हमें मोह-माया से मुक्त करता है।

* पितृ दोष से मुक्ति: ऐसी मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय की पूजा करने से पितरों को शांति मिलती है और पितृ दोष के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। उनकी कृपा से पूर्वजों की आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है।

भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु: प्रकृति से सीखने की कला

भगवान दत्तात्रेय का जीवन हमें सबसे बड़ी सीख देता है कि ज्ञान किसी एक व्यक्ति या शास्त्र तक सीमित नहीं है। उन्होंने चराचर जगत में उपस्थित 24 तत्वों को अपना गुरु बनाया और उनसे शिक्षा ग्रहण की। यह हमें सिखाता है कि यदि हमारे भीतर सीखने की सच्ची लगन हो, तो हर कण हमें कुछ न कुछ सिखा सकता है।

Dattatreya Jayanti 2025 kab hai

उनके 24 गुरुओं में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, चंद्रमा, सूर्य, कबूतर, अजगर, समुद्र, पतंगा, मधुमक्खी, हाथी, हिरण, मछली, पिंगला वेश्या, कुरर पक्षी, बालक, कुमारी कन्या, बाण बनाने वाला, सर्प, मकड़ी और भृंगी कीट शामिल थे।

उदाहरण के लिए:

* पृथ्वी से उन्होंने सहनशीलता और परोपकार सीखा।

* जल से उन्होंने शीतलता और पवित्रता का गुण ग्रहण किया।

* मधुमक्खी से उन्होंने सीखा कि कैसे थोड़ा-थोड़ा संग्रह करके एक बड़ी चीज का निर्माण किया जा सकता है, बिना किसी को कष्ट पहुँचाए।

* अजगर से उन्होंने संतोष और जो मिले उसी में खुश रहना सीखा।

यह सूची हमें प्रेरित करती है कि हम भी अपने आस-पास की दुनिया को एक खुली दृष्टि से देखें और हर अनुभव से सीखने का प्रयास करें।

Dattatreya Jayanti 2025 (दत्तात्रेय जयंती 2025) पर कैसे करें पूजन? (सरल और संपूर्ण विधि)

इस पवित्र दिन पर भगवान दत्तात्रेय की पूजा अत्यंत सरल और भावपूर्ण तरीके से की जा सकती है। आपको किसी बड़े आडंबर की आवश्यकता नहीं, बस एक शुद्ध हृदय और सच्ची श्रद्धा चाहिए।

पूजन सामग्री:

* भगवान दत्तात्रेय की मूर्ति या चित्र

* पीले वस्त्र, पीले फूल, और पीले फल

* चंदन, रोली, अक्षत, धूप, दीप

* पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)

* तुलसी दल

* मिठाई या घर पर बना कोई सात्विक भोग

पूजा विधि:

1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर, संभव हो तो किसी पवित्र नदी में या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ, पीले वस्त्र धारण करें।

2. पूजा स्थल की स्थापना: घर के ईशान कोण में एक साफ चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान दत्तात्रेय का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।

3. संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें। कहें, “हे गुरुदेव दत्त, मैं आज आपकी कृपा प्राप्ति हेतु यह पूजन और व्रत कर रहा/रही हूँ, इसे स्वीकार करें।”

4. आवाहन और अभिषेक: भगवान दत्तात्रेय का ध्यान करें और उनका आवाहन करें। इसके बाद पंचामृत से और फिर शुद्ध जल से उनका अभिषेक करें।

5. वस्त्र और श्रृंगार: भगवान को पीले वस्त्र अर्पित करें। चंदन का तिलक लगाएं, अक्षत, पीले फूल और तुलसी दल चढ़ाएं।

6. धूप-दीप और नैवेद्य: धूप और घी का दीपक जलाएं। अपनी श्रद्धा के अनुसार तैयार किया गया सात्विक भोग अर्पित करें।

7. मंत्र जाप और पाठ: पूजा के दौरान “ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः” मंत्र का जाप करें। इसके अलावा “दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा” का कीर्तन भी कर सकते हैं। समय हो तो ‘गुरुचरित्र’ या ‘दत्त महात्म्य’ का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है।

8. आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में कर्पूर से भगवान दत्तात्रेय की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

9. प्रसाद वितरण: पूजा के बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।

जो भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, वे फलाहार कर सकते हैं या दिन में एक समय सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि दिन भर मन को शांत रखें, किसी की निंदा न करें और गुरुदेव दत्त के स्वरूप का चिंतन करते रहें।

ज्योतिष और दत्तात्रेय जयंती का संबंध

ज्योतिष शास्त्र में, भगवान दत्तात्रेय की पूजा का संबंध देवगुरु बृहस्पति से जोड़ा जाता है। जिनकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर या पीड़ित हो, उन्हें दत्तात्रेय जयंती पर विशेष पूजा-अर्चना करने से लाभ मिलता है।

* ज्ञान और विवेक में वृद्धि: बृहस्पति ज्ञान, विवेक, धर्म और भाग्य के कारक हैं। भगवान दत्तात्रेय की पूजा से बृहस्पति ग्रह को बल मिलता है, जिससे व्यक्ति के ज्ञान और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है।

* विवाह और संतान सुख: यदि विवाह में विलंब हो रहा हो या संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, तो दत्तात्रेय जयंती पर की गई पूजा इन समस्याओं के निवारण में सहायक हो सकती है।

* मानसिक शांति: दत्तात्रेय की पूजा मन को स्थिरता और शांति प्रदान करती है। यह राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को भी कम करने में सहायक मानी जाती है, क्योंकि गुरु का ज्ञान ही अज्ञान रूपी राहु के भ्रम को काट सकता है।

 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: Dattatreya Jayanti 2025 kab hai (दत्तात्रेय जयंती 2025 कब है)?

उत्तर: साल 2025 में दत्तात्रेय जयंती 4 दिसंबर, दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 4 दिसंबर को सुबह 08:37 बजे शुरू होगी और 5 दिसंबर को सुबह 04:43 बजे समाप्त होगी।

प्रश्न: भगवान दत्तात्रेय के माता-पिता कौन थे?

उत्तर: भगवान दत्तात्रेय के पिता महर्षि अत्रि और माता महासती अनुसूया थीं। वे त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के संयुक्त अवतार हैं।

प्रश्न: भगवान दत्तात्रेय की पूजा से क्या लाभ मिलता है?

उत्तर: उनकी पूजा से ज्ञान, बुद्धि, और विवेक की प्राप्ति होती है। जीवन के कष्ट दूर होते हैं, पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग मिलता है।

प्रश्न: क्या महिलाएं दत्तात्रेय जयंती का व्रत कर सकती हैं?

उत्तर: जी हां, कोई भी व्यक्ति, चाहे वह पुरुष हो या महिला, पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान दत्तात्रेय का व्रत और पूजन कर सकता है।

प्रश्न: दत्तात्रेय जयंती पर कौन सा मंत्र सबसे प्रभावशाली है?

उत्तर: इस दिन “ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः” मंत्र का जाप करना सबसे सरल और प्रभावशाली माना जाता है। आप अपनी सुविधानुसार इसकी एक, पांच या ग्यारह माला कर सकते हैं।

 

निष्कर्ष: गुरु कृपा का अमृत पर्व

तो, जब आपका हृदय पूछे कि Dattatreya Jayanti 2025 kab hai (दत्तात्रेय जयंती 2025 कब है), तो उसे बताइएगा कि यह 4 दिसंबर को है। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि स्वयं को जानने का, प्रकृति से जुड़ने का और अपने भीतर बैठे गुरु तत्व को नमन करने का एक सुनहरा अवसर है।

भगवान दत्तात्रेय का जीवन हमें सिखाता है कि धर्म का सार आडंबर में नहीं, बल्कि सरलता, करुणा और निरंतर सीखते रहने की प्रवृत्ति में है। आइए, इस दत्तात्रेय जयंती पर हम सब संकल्प लें कि हम भी अपने जीवन में इन गुणों को उतारेंगे और सृष्टि के हर कण में गुरु का स्वरूप देखकर उससे ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। गुरुदेव दत्त की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।

|| अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त ||

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