सफला एकादशी saphala ekadashi 2024 :-हिन्दू पंचांग के अनुसार पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है।
1. सफला एकादशी का व्रत करने के लिए दशमी तिथि की शाम में व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है।
2. सफला एकादशी के दिन प्रातःकाल उठें, और किसी पेड़ की टहनी से दातुन करें, इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें।
3. स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। स्वयं को चन्दन का तिलक अवश्य करें।
4. अब भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य दें और नमस्कार करते हुए, आपके व्रत और पूजा को सफल बनाने की प्रार्थना करें।
5. अब पूजा करने के लिए सभी सामग्री इकट्ठा करें और पूजा शुरू करें।
6. सबसे पहले पूजा स्थल पर एक चौकी स्थापित करें, और इसे गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
7. इसके बाद चौकी पर एक पीला वस्त्र बिछाएं।
8. चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। चौकी की दायीं तरफ एक दीपक जलाएं।
9. भगवान को रोली-चन्दन का तिलक करें। कुमकुम हल्दी और अक्षत भी चढ़ाएं।
10. अब ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जप करते हुए श्रीहरि को पुष्प, जनेऊ और माला अर्पित करें।
11. भगवान विष्णु को पंचामृत में तुलसीदल डालकर अर्पित करें, भगवान विष्णु को तुलसी अतिप्रिय है इसीलिए भगवान के भोग में तुलसी को अवश्य शामिल करें।
12. भगवान को भोग में मिष्ठान्न और ऋतुफल अर्पित करें।
13. विष्णु सहस्त्रनाम या श्री हरि स्त्रोतम का पाठ करें, इसे आप श्री मंदिर के माध्यम से सुन भी सकते हैं।
14. अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
15. अब सभी लोगों में भगवान को चढ़ाया गया भोग प्रसाद के रूप में वितरित करें।
इस तरह आपकी सफला एकादशी की पूजा संपन्न होगी। इस पूजा को करने से आपको भगवान विष्णु की कृपा निश्चित रूप से प्राप्त होगी।
Saphala Ekadashi 2024:- सफला एकादशी
साल 2024 में saphala ekadashi 2024 पड़ने वाली पहली एकादशी को सफला एकादशी का व्रत रखा जायेगा। हर एकादशी की तरह ये एकादशी भी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत रखकर श्रीहरि की पूजा करने से दुख-दरिद्रता का निवारण होता है। मान्यता है कि सफला एकादशी व्रत से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है, इसीलिए इस एकादशी को ‘सफला एकादशी’ कहा गया है।
सफला एकादशी
07 जनवरी 2024, सोमवार (पौष कृष्ण एकादशी) प्रारंभ- 07 जनवरी, सोमवार 12:41 AM से समाप्त- 08 जनवरी, मंगलवार 12:46 AM तक
पारण समय
08 जनवरी को 06:45 AM से 08:53 AM तक
द्वादशी समाप्त होने का समय – 11:58 PM
• एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना आवश्यक है।
• यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए।
• एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
• हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है।
• व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।
• अगर कोई प्रातकाल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह के बाद पारण करना चाहिए।
• जब एकादशी व्रत दो दिन होता है, तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए।
• दूसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं।
• सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए।
अन्य शुभ मुहूर्त |
• ब्रह्म मुहूर्त- 04:58 AM से 05:51 AM तक
• प्रातः सन्ध्या- 05:25 AM से 06:45 AM तक
• अभिजित मुहूर्त- 11:43 AM से 12:25 PM तक
• विजय मुहूर्त- 01:50 PM से 02:33 PM तक
• गोधूलि मुहूर्त- 05:21 PM से 05:48 PM तक
• सायाह सन्ध्या – 05:23 PM से 06:43 PM तक
• अमृत काल- 01:04 PM से 02:43 PM तक
पौराणिक मान्यता के अनुसार ‘सफला एकादशी’ व्रत से मिलने वाले पुण्य का फल मनुष्य के पांच सहस्त्र वर्ष तक तपस्या करने के समान होता है। सफला एकादशी के दिन घर में तुलसी का पौधा लगाने का विशेष महत्व है।
मान्यता है कि इस दिन लगाए गए तुलसी के पौधे की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
हमारी कामना है कि आपको सफला एकादशी व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो, और आप पर भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहे।
Saphala Ekadashi 2024:-एकादशी पूजा सामग्री
सनातन व्रतों में विशेष एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इस दिन संपूर्ण विधि और उचित सामग्री के साथ पूजा करना अत्यंत फलदायक होता है।
पूजा की सामग्री
चौकी
धूप
पीला वस्त्र
दीप
गंगाजल
हल्दी
भगवान विष्णु की प्रतिमा
कुमकुम
गणेश जी की प्रतिमा
चन्दन
अक्षत
अगरबत्ती
जल का पात्र
तुलसीदल
पुष्प
पञ्चामृत का सामान (दूध, घी, दही, शहद और मिश्री)
माला
मिष्ठान्न
मौली या कलावा
ऋतुफल
जनेऊ
घर में बनाया गया नैवेद्य
नोट – गणेश जी की प्रतिमा के स्थान पर आप एक सुपारी पर मौली लपेटकर इसे गणेशजी के रूप में पूजा में विराजित कर सकते हैं। इस सामग्री के द्वारा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की जाती है! ऐसे ही व्रत, त्यौहार व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए ‘धार्मिक सुविचार’ के साथ धन्यवाद!
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